NEET पेपर लीक पर प्रियंका गांधी का बड़ा हमला, संसद में पूछे तीखे सवाल
NEET पेपर लीक को लेकर लोकसभा में मंगलवार को जोरदार बहस देखने को मिली। NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सरकार को घेरा। इस दौरान पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
प्रियंका गांधी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे विवादों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा
लोकसभा में बोलते हुए प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने का आदेश किस स्तर से दिया गया और इस संबंध में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उनके अनुसार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय बल प्रयोग की खबरों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बिहार की घटना का भी किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने बिहार में प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल की रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन में इस तरह के हथियारों की आवश्यकता क्यों पड़ी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि बाद में सीवान जिला प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान संबंधित कांस्टेबल द्वारा AK-47 का इस्तेमाल अनधिकृत और अनुचित था। प्रशासन ने संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित करने की जानकारी भी दी।
घायल छात्रा की मां का जिक्र कर सुनाया अनुभव
प्रियंका गांधी ने उस छात्रा का भी जिक्र किया जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुई थी और अस्पताल में भर्ती थी। उन्होंने बताया कि वह छात्रा से मिलने अस्पताल गई थीं, जहां उनकी मुलाकात छात्रा की मां से हुई।
उन्होंने कहा कि छात्रा की मां ने अपनी बेटी की हालत को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त की और कई नेताओं के अस्पताल पहुंचने पर भी असहजता जताई। प्रियंका गांधी ने कहा कि इस घटना ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से झकझोर दिया और उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।
परीक्षा व्यवस्था और NTA पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने संसद में कहा कि पिछले वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र इन घटनाओं से प्रभावित हुए, लेकिन दोषियों के खिलाफ अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली के केंद्रीकरण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के गठन के बाद परीक्षा व्यवस्था एक ही संस्था पर अधिक निर्भर हो गई है। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है।
शिक्षा व्यवस्था और बजट पर भी सरकार को घेरा
प्रियंका गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में संसाधनों और नीतियों को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों की गति अपेक्षित नहीं रही और शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था नहीं मिलेगी, तो रोजगार और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेश किया संशोधन विधेयक
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया।
सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। वहीं विपक्ष का मत है कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा संचालन, निगरानी व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
परीक्षा सुधार पर क्यों बढ़ी बहस?
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है। संसद में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि सभी दल परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि संशोधन विधेयक लागू होने के बाद परीक्षा व्यवस्था में कितने प्रभावी बदलाव देखने को मिलते हैं और छात्रों का भरोसा किस हद तक मजबूत हो पाता है।
