पेपर लीक बिल पर अखिलेश का बड़ा हमला, छात्र आंदोलन को बताया ‘इमरजेंसी’ जैसी घटना
पेपर लीक बिल पर लोकसभा में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पेपर लीक बिल पर बोलते हुए उन्होंने दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की तुलना इमरजेंसी से की और कहा कि परीक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या कानून नहीं बल्कि सरकार की नीयत है। संसद में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
मानसून सत्र के दौरान पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा छह दिन के गतिरोध के बाद शुरू हुई। इस दौरान विभिन्न विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार को घेरा।
अखिलेश यादव बोले- राजधानी में इमरजेंसी जैसी तस्वीर देखी
लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने वास्तविक इमरजेंसी का दौर नहीं देखा, लेकिन हाल में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जो घटनाएं हुईं, उनसे उन्हें उसी दौर की झलक दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि सरकार यदि छात्रों की बात समय रहते सुनती, तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार की नीयत भी साफ होनी चाहिए।
छात्र आंदोलन और पेपर लीक को लेकर सरकार पर सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि हालिया छात्र आंदोलन केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके परिवार भी इससे जुड़े। उनका दावा था कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना चाहती है तो सबसे पहले भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सब-इंस्पेक्टर, जूनियर इंजीनियर, लेखपाल, कांस्टेबल भर्ती, यूपी-टीईटी और बोर्ड परीक्षाओं के कथित पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख किया।
राम मंदिर दान मामले का भी किया जिक्र
भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था पर मंदिर के दान की सुरक्षा का सवाल उठ रहा हो, वहां परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने के दावे भी सवालों के घेरे में आते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। इस दौरान उन्होंने सरकार पर अपने चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का भी आरोप लगाया।
किरण रिजिजू ने विपक्ष से पूछा बड़ा सवाल
बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से सवाल किया कि क्या सरकार छात्रों की मांग सुनकर कानून बनाए या फिर आंदोलन को दबाने के लिए इमरजेंसी जैसा कदम उठाए।
इस पर अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा कि असली मुद्दा कानून बनाने का नहीं बल्कि सरकार की सोच और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का है। उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता की बात सुनती है, तभी समस्याओं का समाधान निकलता है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी विधेयक का समर्थन किया, लेकिन सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि 2024 में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने का दावा किया गया था, तो फिर 2026 में संशोधन लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव करना समाधान नहीं है। सरकार को परीक्षा प्रणाली की कमियों को दूर करने और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
NEET, UGC-NET और अन्य परीक्षाओं का भी हुआ जिक्र
अभिषेक बनर्जी ने संसद में कई चर्चित परीक्षा विवादों का उल्लेख किया। उन्होंने NEET-UG, UGC-NET, CBSE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल सजा बढ़ाने से परीक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बावजूद दोषियों को सजा मिलने के मामले सीमित रहे हैं। साथ ही उन्होंने परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की।
विधेयक पर बहस क्यों है महत्वपूर्ण?
पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ाना है।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं होंगे। परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए संस्थागत सुधार, पारदर्शी भर्ती, बेहतर निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई भी जरूरी है। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर संसद में आगे की चर्चा और निर्णय पर सभी की नजर रहेगी।
