CJP पर बोले प्रशांत किशोर, ‘बिहार आए तो स्वागत करेंगे’; शिक्षा व्यवस्था पर भी साधा निशाना

 


प्रशांत किशोर ने रविवार को पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई अहम राजनीतिक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) बिहार में आकर छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर काम करती है, तो उनकी पार्टी उसका स्वागत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सरकार की नीतियों को चुनौती देने वाले हर व्यक्ति के साथ खड़े होने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलन और नए शिक्षा मंत्री से जुड़ी उम्मीदों पर भी अपनी राय रखी।

CJP को लेकर क्या बोले प्रशांत किशोर?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन सरकार के कथित अलोकतांत्रिक व्यवहार और कार्यप्रणाली को चुनौती देना चाहता है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि CJP के कार्यकर्ता बिहार में आकर छात्रों के मुद्दों पर काम करते हैं, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है। उनके अनुसार यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि युवाओं और छात्रों के हितों का सवाल है।

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार रखने वाले लोगों का साथ आना स्वाभाविक है, यदि उनका उद्देश्य जनहित से जुड़ा हो।

सोनम वांगचुक का भी किया जिक्र

प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक उनके व्यक्तिगत मित्र हैं और वह उन्हें लंबे समय से जानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर कई सामाजिक कार्यकर्ता अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

प्रशांत किशोर के अनुसार, जनता जब किसी मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसका असर दिखाई देता है।

छात्र आंदोलन और जवाबदेही पर क्या कहा?

प्रशांत किशोर ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों ने यह दिखाया कि युवाओं की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि छात्र किसी एक राजनीतिक दल या नेता के समर्थन में नहीं, बल्कि अपने भविष्य और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर सामने आए थे।

उनके अनुसार, पेपर लीक, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर युवाओं में लगातार असंतोष बढ़ा है और इन्हीं विषयों ने आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार तभी संभव है, जब शिक्षा सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षा सुधार की बजाय अन्य मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा क्षेत्र में संस्थागत सुधार किए जाने चाहिए।

नए शिक्षा मंत्री से जताई उम्मीद

प्रशांत किशोर ने शिक्षा मंत्रालय में हुए बदलाव पर भी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि नए शिक्षा मंत्री से उम्मीद है कि वे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और कदाचार मुक्त व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगे।

उनके अनुसार, छात्रों का भरोसा बहाल करना और परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर का यह बयान आगामी राजनीतिक समीकरणों और छात्र आंदोलनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

हालांकि उन्होंने किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन की घोषणा नहीं की, बल्कि छात्र हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर सहयोग की बात कही।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न राजनीतिक दल और छात्र संगठन इस मुद्दे पर किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

 मुख्य बातें

  • प्रशांत किशोर ने कहा कि CJP बिहार आती है तो उसका स्वागत किया जाएगा।
  • उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दों पर काम करने वाले हर व्यक्ति का समर्थन होना चाहिए।
  • सोनम वांगचुक को अपना व्यक्तिगत मित्र बताया।
  • छात्र आंदोलन को युवाओं के भविष्य और शिक्षा सुधार से जुड़ा बताया।
  • नए शिक्षा मंत्री से पारदर्शी और कदाचार मुक्त परीक्षा व्यवस्था की उम्मीद जताई।

फिलहाल यह बयान ऐसे समय में आया है, जब शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और छात्र आंदोलनों को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा चल रही है। आगे इस विषय पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठते हैं, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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