68 साल पुराना यह गाना आज भी सुपरहिट, 37 साल तक नहीं टूटा था रिकॉर्ड


 

Madhumati फिल्म का मशहूर गीत Chadh Gayo Papi Bichhua आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। Madhumati का यह गीत रिलीज होने के करीब सात दशक बाद भी उतना ही लोकप्रिय है और अक्सर रियलिटी शोज, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा सोशल मीडिया रील्स में सुनाई देता है। इस गाने की मधुर धुन, वैजयंती माला का दमदार नृत्य और लता मंगेशकर की आवाज ने इसे हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल कर दिया।

दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ यह गाना ही नहीं, बल्कि 1958 में रिलीज हुई फिल्म 'मधुमती' ने भी भारतीय सिनेमा में ऐसा इतिहास रचा, जिसका रिकॉर्ड पूरे 37 साल तक कोई दूसरी फिल्म नहीं तोड़ सकी। आइए जानते हैं इस सदाबहार फिल्म और इसके मशहूर गीत की पूरी कहानी।

'चढ़ गयो पापी बिछुआ' आज भी क्यों है लोगों की पसंद?

1958 में रिलीज हुई फिल्म मधुमती का लोकधुनों से सजा गीत 'चढ़ गयो पापी बिछुआ' आज भी अपनी अलग पहचान रखता है।

गाने में ग्रामीण परिवेश, पारंपरिक संगीत और भारतीय लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है। यही वजह है कि यह गीत हर पीढ़ी के दर्शकों को पसंद आता है।

वैजयंती माला ने अपने शानदार नृत्य और भावपूर्ण अभिनय से इस गीत को यादगार बना दिया। वहीं लता मंगेशकर की मधुर आवाज ने इसे अमर बना दिया।

आज भी कई डांस प्रतियोगिताओं, टीवी रियलिटी शोज और सांस्कृतिक आयोजनों में इस गीत पर प्रस्तुतियां देखने को मिलती हैं।

37 साल तक कायम रहा 'मधुमती' का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

फिल्म मधुमती केवल अपने संगीत और कहानी के कारण ही चर्चित नहीं रही, बल्कि इसने पुरस्कारों के मामले में भी नया इतिहास बनाया।

उपलब्ध फिल्मी रिकॉर्ड के अनुसार, इस फिल्म ने Filmfare Awards में कुल 9 पुरस्कार अपने नाम किए थे। यह उपलब्धि लंबे समय तक भारतीय सिनेमा में सबसे बड़ा रिकॉर्ड रही।

करीब 37 वर्षों तक कोई भी फिल्म इस रिकॉर्ड को पार नहीं कर सकी।

आखिरकार वर्ष 1996 में रिलीज हुई 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (DDLJ)' ने 10 Filmfare Awards जीतकर 'मधुमती' का यह रिकॉर्ड तोड़ा।

यह उपलब्धि आज भी भारतीय फिल्म इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में गिनी जाती है।

फिल्म की सफलता के पीछे कौन-कौन थे?

'मधुमती' की सफलता में कई दिग्गज कलाकारों और रचनाकारों का योगदान रहा।

फिल्म में दिलीप कुमार और वैजयंती माला की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। दोनों कलाकारों के अभिनय ने कहानी को नई ऊंचाई दी।

संगीतकार सलिल चौधरी ने फिल्म का संगीत तैयार किया, जबकि गीतों को शैलेंद्र ने शब्द दिए।

इन दोनों की रचनात्मक साझेदारी ने फिल्म के गीतों को कालजयी बना दिया।

वैजयंती माला ने डांस से बनाई अलग पहचान

वैजयंती माला सिर्फ सफल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगनाओं में भी गिनी जाती हैं।

उन्होंने भरतनाट्यम और कथक जैसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में महारत हासिल की।

उनकी नृत्य शैली ने हिंदी फिल्मों में क्लासिकल डांस को नई पहचान दिलाई।

'चढ़ गयो पापी बिछुआ' में उनकी अभिव्यक्ति और नृत्य आज भी डांस प्रेमियों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।

बॉलीवुड में कैसे शुरू हुआ वैजयंती माला का सफर?

वैजयंती माला ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत तमिल फिल्मों से की थी।

हिंदी सिनेमा में उन्होंने वर्ष 1954 में रिलीज हुई फिल्म 'नागिन' से कदम रखा। इसके बाद उन्होंने लगातार कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया।

उनकी प्रमुख फिल्मों में देवदास, मधुमती, संगम, गंगा जमुना, राम और श्याम तथा अमरदीप जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।

उनके अभिनय और नृत्य ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

आज भी क्यों बनी हुई है 'मधुमती' की लोकप्रियता?

समय बदलने के बावजूद 'मधुमती' और उसके गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है।

इस फिल्म का संगीत, भावनात्मक कहानी, शानदार अभिनय और भारतीय लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुति आज भी नई पीढ़ी को आकर्षित करती है।

यही कारण है कि 'चढ़ गयो पापी बिछुआ' आज भी सोशल मीडिया, डांस स्टेज और संगीत कार्यक्रमों में बराबर सुनाई देता है।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 'मधुमती' को एक ऐसी फिल्म माना जाता है जिसने मनोरंजन के साथ-साथ गुणवत्ता और पुरस्कारों के नए मानक भी स्थापित किए।

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