JDU ने छोटू सिंह को 6 साल के लिए निकाला, पार्टी विरोधी गतिविधियों पर बड़ी कार्रवाई

JDU ने छोटू सिंह को निष्कासित करने का फैसला बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। JDU ने छोटू सिंह को निष्कासित करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी और उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने यह कार्रवाई पार्टी विरोधी आचरण के आरोप में की है। इस फैसले के बाद जेडीयू के भीतर संगठनात्मक बदलाव और असंतोष को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। छोटू सिंह, जिनका पूरा नाम अरविंद सिंह है, लंबे समय से जेडीयू से जुड़े रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी का करीबी माना जाता रहा है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अशोक चौधरी के साथ नजर आते रहे हैं।
JDU ने क्यों की कार्रवाई?
प्रदेश जेडीयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि छोटू सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। इसी आधार पर उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए छह वर्षों के लिए निष्कासन का फैसला लिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से संगठन की ओर से उन्हें अधिकृत कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई थी। इतना ही नहीं, पार्टी कार्यालय में आयोजित मंत्रियों की जनसुनवाई के दौरान भी उन्हें मंत्रियों के साथ बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी।
नई प्रदेश टीम में जगह नहीं मिलने के बाद बढ़ी नाराजगी
हाल ही में जेडीयू ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया। इस नई टीम में कुल 153 नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव, 74 सचिव, 15 प्रकोष्ठ प्रमुख और 9 प्रवक्ता शामिल किए गए हैं। हालांकि, प्रदेश महासचिव रहे छोटू सिंह का नाम इस नई सूची में शामिल नहीं था। सूत्रों का कहना है कि इसी फैसले के बाद उन्होंने संगठन के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। पार्टी के अंदर ऐसे कई नेता बताए जा रहे हैं, जो नई टीम में जगह नहीं मिलने से असंतुष्ट हैं।
संजय कुमार झा से बहस की भी चर्चा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, छोटू सिंह की जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से तीखी बहस हुई थी। हालांकि यह घटना पार्टी कार्यालय में हुई या मुख्यमंत्री आवास पर, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदेश पदाधिकारी नहीं बनाए जाने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। इसके बाद से ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना व्यक्त की जा रही थी। हालांकि पार्टी की ओर से इस विवाद के विस्तृत विवरण पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
पहले भी टिकट नहीं मिलने पर दे चुके हैं इस्तीफा
छोटू सिंह का संगठन के साथ मतभेद पहली बार सामने नहीं आया है। करीब आठ वर्ष पहले बिहार विधान परिषद चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने राज्य कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बातचीत के बाद उन्हें संगठन में बनाए रखा था। बाद में वह फिर सक्रिय राजनीति में लौटे और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे।
बिहार राज्य नागरिक परिषद में भी निभा चुके हैं जिम्मेदारी
पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने छोटू सिंह को बिहार राज्य नागरिक परिषद का महासचिव नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता और बढ़ गई थी। इसी कारण जेडीयू के भीतर उन्हें प्रभावशाली नेताओं में गिना जाने लगा। लेकिन संगठन में हालिया बदलाव के बाद उनकी भूमिका लगातार सीमित होती चली गई, जिसके बाद अब पार्टी ने उनके खिलाफ बड़ा कदम उठाया है।
निष्कासन पर फिलहाल नहीं आया छोटू सिंह का बयान
जेडीयू से निष्कासन के बाद छोटू सिंह की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर अपने बड़े चाचा श्रीकृष्ण सिंह के निधन की जानकारी साझा की है। उन्होंने अंतिम संस्कार में शामिल होने की तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। श्रीकृष्ण सिंह एएन कॉलेज में विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत रह चुके थे। माना जा रहा है कि पारिवारिक शोक के कारण उन्होंने अभी तक पार्टी की कार्रवाई पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। जेडीयू की इस कार्रवाई को संगठनात्मक अनुशासन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में छोटू सिंह इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा।