BPSC रिजल्ट के बाद KGS विवाद गहराया, टॉपर सौरभ के VIDEO से मचा नया बवाल

 


BPSC 70वीं रिजल्ट के बाद KGS विवाद में नया मोड़, सौरभ बोले- 'मैंने वहां पढ़ाई नहीं की'

BPSC 70वीं KGS विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। BPSC 70वीं KGS विवाद उस समय और गहरा गया, जब परीक्षा में 22वीं रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी सौरभ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में सौरभ ने कहा कि उन्होंने न तो खान ग्लोबल स्टडीज (KGS) से नियमित पढ़ाई की और न ही वहां की मेन्स टेस्ट सीरीज ली। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर पहले से चल रही बहस को नया बल मिला है। हालांकि, इस विवाद से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि KGS ने कुछ सफल अभ्यर्थियों को अपना छात्र बताकर प्रचार किया, जबकि कथित तौर पर उनमें से कुछ का संस्थान से नियमित शैक्षणिक संबंध नहीं था। इसी पृष्ठभूमि में सौरभ का वीडियो सामने आया है।

वायरल वीडियो में सौरभ ने क्या कहा?

वायरल वीडियो में सौरभ ने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में कई तरह की बातें कही जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने यह तक दावा किया कि उन्हें पैसे देकर बयान दिलवाया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह खारिज किया।

सौरभ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने KGS में कोई नियमित कोर्स नहीं किया और न ही BPSC मेन्स परीक्षा की टेस्ट सीरीज ली। उनके अनुसार, उन्हें संस्थान का नियमित छात्र बताया जाना सही नहीं है।

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

'इंटरव्यू देने गया था, पढ़ने नहीं'

सौरभ ने वीडियो में बताया कि वह KGS केवल एक एस्पिरेंट्स इंटरव्यू में भाग लेने के लिए गए थे।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई अभ्यर्थी अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में इंटरव्यू, मॉक सेशन या चर्चा कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य इंटरव्यू कौशल विकसित करना और आत्मविश्वास बढ़ाना होता है।

उन्होंने कहा कि किसी इंटरव्यू में शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति उस संस्थान का नियमित छात्र है।

फ्री मॉक टेस्ट को लेकर भी दी सफाई

सौरभ ने कहा कि कई कोचिंग संस्थान समय-समय पर निशुल्क मॉक टेस्ट आयोजित करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र भाग लेते हैं।

उन्होंने भी ऐसे एक मॉक टेस्ट में हिस्सा लेने की बात स्वीकार की। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मॉक टेस्ट देने से किसी को संस्थान का छात्र नहीं माना जा सकता।

उनके अनुसार, मॉक टेस्ट और नियमित कक्षा में भाग लेने के बीच स्पष्ट अंतर होता है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

BPSC 70वीं परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि KGS ने कई सफल अभ्यर्थियों को अपना छात्र बताते हुए प्रचार सामग्री जारी की।

इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों के कथित बयान सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें कहा गया कि उन्होंने वहां नियमित पढ़ाई नहीं की थी।

इसी क्रम में अब सौरभ का वीडियो भी सामने आया है, जिसने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, इन सभी दावों और वायरल पोस्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

खान सर और KGS की प्रतिक्रिया

इस पूरे विवाद के दौरान KGS और खान सर की ओर से अलग-अलग समय पर प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

वहीं सोशल मीडिया पर समर्थकों और आलोचकों के बीच बहस लगातार जारी है। कुछ लोग कोचिंग संस्थानों के प्रचार के तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अन्य पक्ष संस्थान के समर्थन में भी अपनी राय रख रहे हैं।

फिलहाल इस मामले में किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा कोई आधिकारिक जांच या अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।

कोचिंग सेक्टर की पारदर्शिता पर बढ़ी चर्चा

BPSC परिणाम के बाद यह विवाद केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों के प्रचार, चयनित छात्रों के दावों और पारदर्शिता को लेकर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई संस्थान किसी सफल अभ्यर्थी को अपना छात्र बताता है, तो उसके लिए स्पष्ट और सत्यापित जानकारी प्रस्तुत करना आवश्यक है। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल दावों को भी तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

एक नजर में मुख्य बातें

  • BPSC 70वीं परीक्षा में 22वीं रैंक लाने वाले सौरभ का वीडियो वायरल।
  • सौरभ ने कहा कि उन्होंने KGS से नियमित पढ़ाई नहीं की।
  • इंटरव्यू और मॉक टेस्ट में शामिल होने की बात स्वीकार की।
  • सोशल मीडिया पर KGS के प्रचार को लेकर पहले से विवाद जारी।
  • वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
  • मामले ने कोचिंग संस्थानों की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।
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