भरत तिवारी एनकाउंटर केस के आरोपी DSP को नई पोस्टिंग, फिर गरमाई बिहार की सियासत


 

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर नया घटनाक्रम सामने आया है। भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नामजद तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा को बिहार सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंप दी है। बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें पुलिस मुख्यालय से हटाकर पुलिस उपाधीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में तैनात किया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इस मामले में दर्ज एफआईआर और न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार लगातार आवाज उठा रहा है।

राज्य सरकार ने हाल ही में 12 आईपीएस और 53 डीएसपी स्तर के अधिकारियों का तबादला किया है। इसी सूची में राजेश कुमार शर्मा का नाम भी शामिल है। नई पोस्टिंग के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर मामला फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया था। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया, जबकि मृतक के परिजनों ने शुरुआत से ही इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया।

परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई और बाद में इसे पुलिस मुठभेड़ का रूप दे दिया गया। इसी आरोप के आधार पर परिजन लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

आरोपी DSP को मिली नई जिम्मेदारी

भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को उनके पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया था। अब सरकार ने उन्हें पुलिस उपाधीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में तैनात कर दिया है।

यह विभाग बिहार में शराबबंदी कानून और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अहम माना जाता है। हालांकि नई पोस्टिंग के बाद विपक्ष और पीड़ित परिवार इस फैसले पर सवाल उठा सकते हैं।

भरत की मां की शिकायत पर दर्ज हुई थी एफआईआर

24 जून को भोजपुर पुलिस ने भरत भूषण तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की थी। एफआईआर में तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया।

परिजनों का आरोप है कि घटना में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। परिवार लगातार सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।

तबादले के बाद फिर उठे सवाल

राजेश कुमार शर्मा को नई पोस्टिंग मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है, तब नामजद अधिकारी को नई जिम्मेदारी देना क्या उचित है।

हालांकि सरकार की ओर से तबादले को लेकर कोई अलग आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। प्रशासनिक तबादले नियमित प्रक्रिया का हिस्सा भी होते हैं, इसलिए इस फैसले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

बिहार की राजनीति में भी बना बड़ा मुद्दा

भरत तिवारी की मौत के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर कई सवाल उठाए थे। विभिन्न राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की थी।

पीड़ित परिवार भी लगातार आंदोलन और कानूनी लड़ाई के जरिए न्याय की मांग कर रहा है। ऐसे में आरोपी अधिकारी की नई पोस्टिंग ने इस पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

आगे क्या होगा?

अब इस मामले में जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि पीड़ित परिवार और विपक्ष नई पोस्टिंग को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल सरकार ने केवल प्रशासनिक तबादले की सूची जारी की है और मामले की जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी है।

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