Bhojpur Missing Case: सनोज केस में बड़ा एक्शन, 6 पुलिसकर्मी गिरफ्तार, हाईकोर्ट की सख्त निगरानी
Bhojpur Missing Case में लापता दलित युवक सनोज कुमार की गुमशुदगी ने नया मोड़ ले लिया है। Bhojpur Missing Case में पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भोजपुर पुलिस ने उत्पाद विभाग से जुड़े दो एएसआई, तीन होमगार्ड और एक निजी चालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं और साफ किया है कि मामले की निगरानी स्वयं हाईकोर्ट करेगा। पुलिस अब तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सनोज कुमार की तलाश में जुटी है।
बताया जा रहा है कि सनोज कुमार को 13 अगस्त 2025 को भोजपुर जिले के बिहिया क्षेत्र से उत्पाद विभाग की टीम ने हिरासत में लिया था। इसके बाद से वह अपने घर नहीं लौटे। पुलिस का दावा है कि वह हिरासत से भाग गया था, लेकिन जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने इस दावे पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद छह लोगों की गिरफ्तारी
पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद भोजपुर पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पुलिस ने जगदीशपुर उत्पाद थाना में तैनात दो सहायक अवर निरीक्षक (ASI), तीन होमगार्ड जवान और एक निजी चालक को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। कोर्ट के आदेश के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने भी इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है। वहीं एक अन्य संदिग्ध पुलिसकर्मी से पूछताछ जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?
गंज गांव निवासी सनोज कुमार के परिजनों के अनुसार, 13 अगस्त 2025 की शाम उन्हें फोन पर जानकारी मिली थी कि उत्पाद विभाग की टीम ने सनोज को पकड़ लिया है। परिवार जब बताए गए स्थान पर पहुंचा तो वह वहां नहीं मिला।
बाद में उसकी बाइक लावारिस हालत में बरामद हुई। परिवार का आरोप है कि इसके बाद लगातार तलाश और शिकायत के बावजूद युवक का कोई पता नहीं चल सका। अंततः उन्होंने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पुलिस की 'भागने' वाली कहानी पर उठे सवाल
उत्पाद विभाग का कहना है कि हिरासत में लिया गया युवक रास्ते में ट्रैफिक जाम के दौरान वाहन का पिछला दरवाजा खोलकर भाग गया था।
हालांकि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे इस दावे पर सवाल उठने लगे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि युवक भाग गया था तो उसके खिलाफ तत्काल स्थानीय थाने में रिपोर्ट या एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि सनोज का मोबाइल पुलिस के पास मिला। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वह भाग निकला था तो उसका मोबाइल पुलिस की हिरासत में कैसे रह गया।
भाई के बयान ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
सनोज कुमार के भाई निरंजन कुमार ने अदालत और पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि गिरफ्तारी के बाद उनके भाई ने फोन कर बताया था कि उसे आबकारी पुलिस ने पकड़ लिया है।
उनका दावा है कि दूसरी बार बात होने पर सनोज रो रहा था और उसने कहा था कि बार-बार फोन मत करो, पुलिस मार रही है। इसके कुछ देर बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। इस बयान के बाद मामले को और गंभीर माना जा रहा है।
हाईकोर्ट करेगा पूरे मामले की मॉनिटरिंग
पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता लापता युवक की बरामदगी और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाना है।
कोर्ट ने जांच की निगरानी भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को सौंपी है। साथ ही यह भी कहा कि पूरे मामले की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट स्वयं करेगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की उस थ्योरी पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि युवक बंद बोलेरो वाहन से भाग गया था। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए अदालत ने इस दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य वैज्ञानिक तरीकों के आधार पर सनोज कुमार की तलाश कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कार्रवाई भी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
यह मामला राज्य में हिरासत, जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
