भरत तिवारी एनकाउंटर पर बीजेपी सांसद मैथिली ठाकुर ने उठाए सवाल, दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग


 भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब भरत तिवारी एनकाउंटर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद मैथिली ठाकुर ने भी खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कथित पुलिस मुठभेड़ को गलत बताते हुए कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पुलिसकर्मियों ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस बीच राज्य सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच आयोग ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।

बीजेपी सांसद मैथिली ठाकुर ने क्या कहा?

पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बीजेपी सांसद मैथिली ठाकुर ने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में मजबूत हुई है और अपराधियों में पुलिस का भय दिखाई देता है। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पुलिस लगातार सक्रिय है और कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है। हालांकि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि भरत तिवारी मुठभेड़ गलत तरीके से हुई है तो इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी भी परिस्थिति में कानून के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी।

न्यायिक जांच आयोग ने शुरू की जांच

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर की जांच अब न्यायिक आयोग कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा अधिकारियों की टीम के साथ बिलौटी गांव पहुंचे। उनके साथ शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के डीएम तनय सुल्तानिया और एसपी श्री राज भी मौजूद रहे। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ मृतक भरत भूषण तिवारी के परिजनों से भी विस्तृत बातचीत की। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने घटना से जुड़े अपने पक्ष और आशंकाओं को आयोग के सामने रखा।

परिजनों ने जताया डर, आयोग ने दिया भरोसा

परिजनों ने न्यायिक जांच आयोग के सामने दावा किया कि घटना के बाद से वे लगातार भय के माहौल में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय थाना पुलिस के जवान अक्सर उनके घर पहुंच जाते हैं, जिससे परिवार मानसिक दबाव महसूस करता है। परिवार ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में महिला पुलिसकर्मियों के आने से भी घर के सदस्य असहज महसूस कर रहे हैं। इस पर न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा ने उन्हें आश्वस्त किया कि बिना आवश्यकता पुलिस उनके घर नहीं जाएगी और जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी

भरत भूषण तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), तत्कालीन शाहपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) और घटना में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुई है। मामले में दर्ज शिकायत के बाद पुलिस कार्रवाई और कथित एनकाउंटर की वैधता पर सवाल उठने लगे। यही कारण है कि सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर नजर

भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष भी न्यायिक जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाने की बात कह रहा है। बीजेपी सांसद मैथिली ठाकुर का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने कानून-व्यवस्था की तारीफ करते हुए भी कथित फर्जी एनकाउंटर की स्थिति में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इससे साफ संकेत मिलता है कि मामले में निष्पक्ष जांच की अपेक्षा सभी पक्षों की ओर से की जा रही है। अब सभी की नजर न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि 17 जून को बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

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