पटना: बिहार की राजधानी पटना में स्थित खान ग्लोबल स्टूडियो पर हुई तोड़फोड़ और पथराव की घटना के बाद रौशन आनंद अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। इस मामले में पुलिस ने रौशन आनंद समेत कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। वहीं सोशल मीडिया और छात्रों के बीच यह सवाल तेजी से पूछा जा रहा है कि आखिर रौशन आनंद कौन हैं और उन्होंने शिक्षा जगत में अपनी पहचान कैसे बनाई।
मामला केवल एक कोचिंग विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बिहार के दो चर्चित शैक्षणिक संस्थानों के नाम सामने आने के कारण लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
खान ग्लोबल स्टूडियो पर क्या हुआ था?
मंगलवार रात पटना के कदमकुआं इलाके में स्थित खान ग्लोबल स्टूडियो के बाहर पथराव, तोड़फोड़ और मारपीट की घटना सामने आई। आरोप है कि कुछ लोगों ने परिसर में घुसकर गार्ड के साथ भी मारपीट की।
घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान ज्ञान बिंदु कोचिंग से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आए, जिसके बाद रौशन आनंद सहित अन्य सहयोगियों को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, रौशन आनंद ने अपने ऊपर लगे आरोपों को साजिश बताते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही है।
कौन हैं रौशन आनंद?
रौशन आनंद बिहार के चर्चित शैक्षणिक संस्थान ‘ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी’ के संस्थापक और निदेशक हैं। उनका नाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों में जाना जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रौशन आनंद का संबंध बिहार के सहरसा जिले के धमसेना गांव के एक किसान परिवार से है। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूरी की।
बचपन से ही उनका सपना बेहतर शिक्षा हासिल कर जीवन में कुछ बड़ा करने का था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ने का प्रयास नहीं छोड़ा।
15 साल की उम्र में छोड़ा गांव
रौशन आनंद के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वे लगभग 15 वर्ष की उम्र में पढ़ाई और करियर बनाने के उद्देश्य से पटना पहुंचे।
यहां उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। बाद में बेहतर तैयारी के लिए कोटा भी गए। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने एआईईईई (AIEEE) परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल की।
इस सफलता के बाद उन्हें बीआईटी मेसरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश मिला, लेकिन आर्थिक परिस्थितियां उनके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा बन गईं।
अधूरा रह गया इंजीनियर बनने का सपना
बीआईटी मेसरा में दाखिला मिलने के बावजूद रौशन आनंद अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। आर्थिक कठिनाइयों और अन्य व्यक्तिगत चुनौतियों के कारण उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
हालांकि इस झटके के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना फोकस प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर लगाया और लगातार प्रयास जारी रखा।
उन्होंने बिहार पुलिस, बीपीएससी और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में हिस्सा लिया। कई बार सफलता के करीब पहुंचने के बावजूद अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके।
जब फीस की जगह छात्रों से लेते थे खाना
संघर्ष के दिनों में रौशन आनंद ने छात्रों को पढ़ाना शुरू किया। शुरुआती समय में उनके पास न तो बड़ा संस्थान था और न ही पर्याप्त संसाधन।
बताया जाता है कि कई बार वे छात्रों से फीस के बदले भोजन स्वीकार कर लेते थे। इसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि पढ़ाना ही उनका वास्तविक जुनून है।
धीरे-धीरे उनकी पढ़ाने की शैली और प्रतियोगी परीक्षाओं की समझ छात्रों के बीच लोकप्रिय होने लगी।
चार छात्रों से शुरू हुई ज्ञान बिंदु अकादमी
1 सितंबर 2017 को रौशन आनंद ने ‘ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी’ की शुरुआत की। शुरुआत बेहद छोटी थी और केवल चार छात्र ही संस्थान से जुड़े थे।
समय के साथ छात्रों की संख्या बढ़ती गई। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के कारण संस्थान की पहचान भी मजबूत होती गई।
आज ज्ञान बिंदु जीएस अकादमी बिहार पुलिस, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले प्रमुख संस्थानों में गिनी जाती है।
विवाद के बाद फिर चर्चा में आए रौशन आनंद
अब तक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के क्षेत्र में पहचाने जाने वाले रौशन आनंद का नाम खान सर कोचिंग विवाद के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका थी।
