रौशन आनंद गिरफ्तारी मामले में NHRC सख्त, मानवाधिकार से मांगी दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट

 


पटना। रौशन आनंद गिरफ्तारी मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। रौशन आनंद गिरफ्तारी मामला में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथमदृष्ट्या मानवाधिकार उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं। इसके बाद मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है।

यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई है जिसे मानवाधिकार कार्यकर्ता और ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने आयोग को भेजा था। शिकायत में गिरफ्तारी की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद को कदमकुआं थाना क्षेत्र में दर्ज एक प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गिरफ्तारी से पहले पर्याप्त जांच नहीं की गई और पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की।

शिकायत में कहा गया है कि दो जून को दर्ज एफआईआर के बाद बिना पर्याप्त साक्ष्य जुटाए रौशन आनंद को हिरासत में लिया गया। इसी आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।

मामले ने सोशल मीडिया और शैक्षणिक समुदाय में भी चर्चा पैदा की है। कई लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि कानून को अपना काम करने देना चाहिए।

NHRC ने क्यों लिया संज्ञान?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायत का अध्ययन करने के बाद इसे गंभीर माना। आयोग की खंडपीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है।

आयोग का मानना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।

इसी कारण आयोग ने पटना SSP कार्तिकेय शर्मा से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।

शिकायत में क्या-क्या आरोप लगाए गए?

मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि रौशन आनंद को बिना निष्पक्ष जांच के गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि रौशन आनंद किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखे बिना कार्रवाई की गई। शिकायत में गिरफ्तारी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आयोग की जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू SSP कार्यालय की रिपोर्ट होगी। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट में प्रक्रिया संबंधी कोई कमी पाई जाती है तो आयोग आगे अतिरिक्त निर्देश जारी कर सकता है। वहीं यदि पुलिस कार्रवाई नियमों के अनुरूप साबित होती है तो मामला अलग दिशा ले सकता है।

इस कारण आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की चर्चित कानूनी और प्रशासनिक घटनाओं में शामिल रह सकता है।

दूसरी ओर मानव अधिकार मंच का धरना

इसी बीच बिहार में मानव अधिकार मंच ने भी विभिन्न जनसरोकारों को लेकर आवाज बुलंद की। मंच के बैनर तले भय, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर एक दिवसीय धरना और प्रदर्शन आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का नेतृत्व मंच के अध्यक्ष रामयतन यादव ने किया। धरना रेलवे गुमटी के उत्तर स्थित सामुदायिक चबूतरे पर आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भागीदारी की।

वक्ताओं ने कहा कि आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से प्रभावित है। साथ ही बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर भी चिंता जताई गई।

धरने में उठीं स्थानीय विकास की मांगें

धरने के दौरान कई स्थानीय मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। रामयतन यादव ने खुसरूपुर थाना भवन के निर्माण, प्रखंड कार्यालय की मरम्मत और जल-जमाव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।

प्रतिभागियों ने प्रशासन से बुनियादी सुविधाओं में सुधार और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की अपील की। मंच का कहना है कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल रौशन आनंद गिरफ्तारी मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच और प्रशासन की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

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