राबड़ी देवी के बंगले पर बढ़ा सियासी घमासान, तेज प्रताप बोले- पहले नीतीश कुमार खाली करें आवास

 


राबड़ी देवी बंगला विवाद पर तेज प्रताप का पलटवार, नीतीश कुमार का नाम लेकर उठाया बड़ा सवाल

बिहार की राजनीति में इन दिनों राबड़ी देवी बंगला विवाद चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। राज्य सरकार द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के लिए 15 दिनों की मोहलत दिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी राबड़ी देवी बंगला विवाद के बीच अब उनके बड़े बेटे और राजद नेता तेज प्रताप यादव ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

तेज प्रताप यादव ने कहा कि यदि सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित आवास खाली करवाने के नियम लागू कर रही है, तो इसकी शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

राबड़ी देवी को मिला 15 दिन का नोटिस

राज्य सरकार ने राबड़ी देवी को पटना स्थित 10, सर्कुलर रोड के सरकारी बंगले को खाली करने के लिए 15 दिनों का नोटिस दिया है। यह बंगला लंबे समय से उनके पास आवंटित है और वह वर्ष 2006 से यहां रह रही हैं।

भवन निर्माण विभाग ने हाल ही में एक आदेश जारी कर इस आवास को डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। इसके बाद राबड़ी देवी को बंगला खाली करने की प्रक्रिया शुरू हुई।

तेज प्रताप यादव ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत के दौरान तेज प्रताप यादव ने सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है, तो यही नियम नीतीश कुमार पर भी लागू होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार भी पूर्व मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में सरकार को पहले उन्हें नोटिस देना चाहिए। तेज प्रताप यादव के अनुसार, जब नीतीश कुमार अपना आवास खाली कर देंगे, तब राबड़ी देवी भी बंगला छोड़ देंगी।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

रोहिणी आचार्या ने सरकार पर साधा निशाना

इस विवाद पर राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्या ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया।

रोहिणी ने कहा कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है जबकि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और अपराध जैसे मुद्दे गंभीर बने हुए हैं। उन्होंने आवास खाली कराने की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

रोहिणी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

“मैं बंगला खाली नहीं करूंगी” – राबड़ी देवी

नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने भी अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जो निर्णय ले, वह बंगला खाली नहीं करेंगी।

राबड़ी देवी ने कहा कि सरकार यदि उन्हें जबरन निकालना चाहती है तो प्रयास करके देख ले। उनके इस बयान के बाद विवाद और अधिक गहरा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें मजबूती से रख रहे हैं।

आगे क्या हो सकता है?

सरकार द्वारा जारी नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर अगला कदम तय किया जाएगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि राबड़ी देवी आवास खाली करेंगी या कानूनी एवं राजनीतिक स्तर पर इस फैसले को चुनौती दी जाएगी।

दूसरी ओर, विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मुद्दा बता रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विवाद पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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