Headline: NEET Re-Exam में बड़ा खुलासा, मेडिकल छात्र अर्पित सिंह पर सॉल्वर गैंग चलाने का आरोप

 


NEET Re-Exam मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। NEET Re-Exam से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच में अब मेडिकल छात्र अर्पित सिंह का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क का संचालन कर रहा था, जिसमें सॉल्वर, बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े लोग और अन्य सहयोगी शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है।

जांच में मिले सुरागों के आधार पर कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कुछ अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से इस पूरे नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

अर्पित सिंह के कमरे पर छापेमारी, इलेक्ट्रॉनिक टैब जब्त

जांच के दौरान गया में स्थित मगध मेडिकल कॉलेज के छात्र अर्पित सिंह के हॉस्टल कमरे पर पुलिस ने छापेमारी की।

टाउन डीएसपी-2 धर्मेंद्र भारती और मगध मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में अर्पित के कमरे से एक इलेक्ट्रॉनिक टैब जब्त किया गया। जांच एजेंसियां अब इस डिवाइस में मौजूद डाटा की पड़ताल कर रही हैं।

अधिकारियों को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड से कथित नेटवर्क के संचालन, संपर्कों और लेन-देन से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।

नौ सॉल्वर्स को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का आरोप

जांच में सामने आया है कि अर्पित सिंह पर कथित तौर पर कई सॉल्वर्स को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और उनकी व्यवस्था करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, मुजफ्फरपुर के कांटी क्षेत्र के निवासी विवेक कुमार को इस नेटवर्क में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए शामिल किया गया था। विवेक को लखीसराय के एक परीक्षा केंद्र पर दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया।

पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के बाद जांच का दायरा बढ़ा और कई अन्य संदिग्धों तक एजेंसियां पहुंचीं।

तीन परीक्षा केंद्रों से जुड़े मिले सुराग

जांच में लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों—केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय—का नाम सामने आया है।

अधिकारियों का कहना है कि इन केंद्रों पर कथित तौर पर डमी अभ्यर्थियों को बैठाने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।

हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।

बायोमेट्रिक सत्यापन में गड़बड़ी के आरोप

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है।

जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ कर्मियों ने निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसी वजह से कथित तौर पर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिल सका।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

मेडिकल छात्रों और अन्य आरोपियों की भूमिका पर जांच

मामले में कई मेडिकल छात्रों के नाम सामने आने के बाद जांच और व्यापक हो गई है।

अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी। जांच का फोकस केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संपर्क तंत्र और आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यह नेटवर्क किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा था।

डिजिटल साक्ष्य बन सकते हैं अहम कड़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में मोबाइल फोन, टैबलेट, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल लेन-देन सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होते हैं।

इसी वजह से जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इससे कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली और अन्य जुड़े लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे संभव हैं।

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल निगरानी और परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सके।

फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।

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