सीजफायर के बीच फिर गरजा ईरान, कुवैत पर मिसाइल-ड्रोन हमले से दहला खाड़ी क्षेत्र

 


सीजफायर के बीच फिर गरजा ईरान

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान-कुवैत तनाव के बीच सोमवार सुबह कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले की खबर सामने आई। कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सभी हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। इस घटना के बाद पूरे देश में हवाई हमले के सायरन बजने लगे। ईरान-कुवैत तनाव ऐसे समय बढ़ा है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने की बात कही जा रही है। लगातार हो रहे हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

कुवैत की सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि लोगों को जो धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, वे एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा दुश्मन के हमलों को नष्ट करने की कार्रवाई का हिस्सा थीं। हालांकि, इस हमले में किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

कुवैत में फिर बजे एयर रेड सायरन

कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी ‘कुना’ के मुताबिक, पूरे देश में एयर रेड अलर्ट जारी किया गया। राजधानी समेत कई इलाकों में लोगों ने तेज धमाकों की आवाजें सुनीं। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत हाई अलर्ट घोषित कर दिया।

यह पहला मौका नहीं है जब कुवैत को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले 28 मई को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटना सामने आई थी। उस समय दावा किया गया था कि ईरान ने बंदर अब्बास में अमेरिकी हमले के जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस को टारगेट किया था।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार हो रहे हमले सीजफायर की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। खाड़ी देशों में पहले से मौजूद तनाव अब और गहराता दिख रहा है।

ईरान ने अमेरिकी बेस को निशाना बनाने का दावा किया

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जिनका इस्तेमाल अमेरिका ने ईरानी क्षेत्र पर हमले के लिए किया था। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी खास अमेरिकी बेस का नाम नहीं लिया।

ईरान की ओर से आए इस बयान ने संकेत दिया है कि क्षेत्र में संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से अब तक इस हमले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो पश्चिम एशिया में कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

खाड़ी देशों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में शामिल है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात और बिगड़े तो वैश्विक तेल बाजार पर भी असर देखने को मिल सकता है।

ईरान की मिसाइल ताकत फिर बनी चिंता

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने कई अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों तक दोबारा पहुंच हासिल कर ली है। दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान ईरान के 18 भूमिगत मिसाइल बेस को निशाना बनाया था और 69 सुरंगों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए थे।

हालांकि, अब रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान ने इनमें से करीब 50 सुरंगों को दोबारा खोल लिया है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।

रक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक, ईरान की यह सैन्य तैयारी भविष्य में क्षेत्रीय संघर्ष को और जटिल बना सकती है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर अभी भी संशय

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में कुछ अतिरिक्त बदलाव की मांग की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नए मसौदे में 60 दिनों तक संघर्ष रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से बातचीत शुरू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भी अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका।

ट्रंप ने संकेत दिया है कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना सबसे अहम मुद्दा रहेगा। यही कारण है कि बातचीत जारी रहने के बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा।

क्या खाड़ी क्षेत्र में फिर बढ़ेगा सैन्य तनाव?

लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। सीजफायर लागू होने के बावजूद सैन्य गतिविधियां जारी हैं।

कुवैत पर हुए ताजा हमले ने यह संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा वैश्विक मुद्दा बन सकती है। अब दुनिया की नजर अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।

Source: कुवैत सरकारी समाचार एजेंसी KUNA, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स, CNN, CBS News

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