
गया टेक्नोलॉजी सेंटर परियोजना के लिए रविवार का दिन ऐतिहासिक रहा। गया टेक्नोलॉजी सेंटर का शिलान्यास खिजरसराय प्रखंड के साधुनगर में किया गया। करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह अत्याधुनिक केंद्र दक्षिण बिहार में कौशल विकास, रोजगार और औद्योगिक निवेश को नई दिशा देने की उम्मीद जगाता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने संयुक्त रूप से भूमि पूजन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की।
20 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर
प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर गया-इस्लामपुर-खिजरसराय मार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित साधुनगर में बनाया जाएगा। यह परियोजना 20 एकड़ भूमि पर विकसित होगी। केंद्र में आधुनिक मशीनें, तकनीकी प्रयोगशालाएं और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ना और उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना है।
भवन निर्माण पर ही खर्च होंगे 83 करोड़ रुपये
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 170 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें मुख्य भवन के निर्माण पर करीब 83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्रशिक्षण अवसंरचना, आधुनिक उपकरण, प्रयोगशालाएं और अन्य तकनीकी सुविधाओं पर भी बड़ी राशि निवेश की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह केंद्र आने वाले वर्षों में दक्षिण बिहार के तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
10 हजार युवाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि केंद्र के संचालन शुरू होने के बाद हर वर्ष हजारों युवाओं को तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। अनुमान है कि करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न कौशल आधारित कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा। इससे रोजगार क्षमता बढ़ेगी और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना स्थानीय युवाओं के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।
बिहटा के बाद बिहार का दूसरा टेक्नोलॉजी सेंटर
एमएसएमई मंत्रालय के तहत स्थापित होने वाला यह बिहार का दूसरा टेक्नोलॉजी सेंटर होगा। इससे पहले ऐसा केंद्र बिहटा में स्थापित किया गया था। गया में केंद्र बनने के बाद नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और आसपास के जिलों के युवाओं को उच्चस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर कौशल विकास को नई गति मिलने की संभावना है।
रोजगार और औद्योगिक निवेश को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना से स्थानीय उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा। इससे नए उद्योगों के निवेश की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। एमएसएमई सेक्टर को मजबूती मिलने के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को तकनीकी सहयोग भी मिलेगा। इससे दक्षिण बिहार में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में दिखा राजनीतिक विवाद
भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान एक राजनीतिक विवाद भी सामने आया। जिला परिषद अध्यक्ष नैना देवी और उपाध्यक्ष शीतल प्रसाद यादव ने मंच पर स्थान नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताई। दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया और व्यवस्था पर सवाल उठाए।
कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी रहे मौजूद
भूमि पूजन समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री संतोष कुमार सुमन, उद्योग एवं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और डीजीपी विनय कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
- 170 करोड़ रुपये का निवेश
- 20 एकड़ में विकसित होगा केंद्र
- 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षण का लक्ष्य
- दक्षिण बिहार के कई जिलों को मिलेगा लाभ
- औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा
- एमएसएमई सेक्टर को मिलेगी नई मजबूती
दक्षिण बिहार के लिए यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण योजना नहीं, बल्कि कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों का आधार मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।