Bihar Tender Fixing Case: तीन साल पुरानी FIR से खुला टेंडर हेरफेर का जाल, जांच में सामने आए नए खुलासे


 

Bihar Tender Fixing Case एक बार फिर चर्चा में है। Bihar Tender Fixing Case की शुरुआत भले ही एक अलग मामले से हुई हो, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ सरकारी ठेकों में कथित हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं के कई पहलू सामने आए। प्रवर्तन निदेशालय (ED), विशेष निगरानी इकाई (SVU) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के बाद यह मामला राज्य की चर्चित जांचों में शामिल हो गया है।

जांच एजेंसियों के दस्तावेजों के अनुसार, सरकारी ठेकों से जुड़े लेनदेन और कथित कमीशन व्यवस्था की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि, मामले की अंतिम सच्चाई अदालत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

2023 की FIR से शुरू हुई जांच की कहानी

इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से हुई थी। उस मामले में एक महिला ने पूर्व विधायक और एक आईएएस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे।

एफआईआर में पहली बार ठेकेदार रिशुश्री का नाम भी सामने आया। शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि सरकारी ठेकों से जुड़े लेनदेन में विभिन्न माध्यमों से कथित कमीशन दिया गया।

हालांकि बाद में आईएएस अधिकारी से संबंधित मूल मामला निरस्त हो गया, लेकिन जांच के दौरान सामने आए वित्तीय पहलुओं ने एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

ED ने कैसे दर्ज किया पहला मामला?

एफआईआर में शामिल भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120B को आधार बनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने 14 मार्च 2024 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पहली ईसीआईआर (ECIR) दर्ज की।

इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और सरकारी ठेकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू हुई। ईडी ने संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों की गतिविधियों की पड़ताल की।

जांच एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि सरकारी ठेकों के आवंटन में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध वित्तीय लाभ तो नहीं लिया गया।

जुलाई 2024 में हुई बड़ी छापेमारी

जांच के क्रम में 16 जुलाई 2024 को ईडी ने रिशुश्री से जुड़ी कंपनी मेसर्स रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय और अन्य परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। इसके बाद पीएमएलए की धारा 17 के तहत जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच कई दिनों तक बयान दर्ज किए गए।

जांच एजेंसी का दावा है कि इन बयानों और दस्तावेजों के आधार पर सरकारी ठेकों में कथित हेरफेर से जुड़ी जानकारियां सामने आईं।

ED के पत्र के बाद SVU ने दर्ज किया केस

20 अगस्त 2024 को ईडी ने पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) को एक विस्तृत पत्र भेजा।

इस पत्र में उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। इसके बाद 14 सितंबर 2024 को एसवीयू ने भ्रष्टाचार से संबंधित पहला मामला दर्ज किया।

इस कार्रवाई के साथ राज्य स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया तेज हो गई।

2025 में EOU को भेजा गया नया पत्र

जांच यहीं नहीं रुकी। 14 फरवरी 2025 को ईडी ने बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के एडीजी को एक और पत्र भेजा।

इस पत्र में आरोप लगाया गया कि कुछ कंपनियों के माध्यम से जल संसाधन विभाग से जुड़े सरकारी ठेकों में कार्य लिया गया। साथ ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका की भी जांच की आवश्यकता बताई गई।

ईडी ने अपने पत्र में सरकारी ठेकों के आवंटन और प्रक्रिया में कथित मिलीभगत की आशंका जताई थी।

दूसरी FIR में किन लोगों के नाम आए?

ईडी के पत्र के आधार पर 30 अप्रैल 2025 को बिहार सरकार की विशेष निगरानी इकाई ने दूसरी प्राथमिकी दर्ज की।

इस केस में रिशुश्री, पूर्व वरिष्ठ अधिकारी Sanjeev Hans तथा अन्य अज्ञात अधिकारियों को नामजद किया गया। जांच एजेंसियां अब संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और ठेकों की प्रक्रिया की जांच कर रही हैं।

हालांकि आरोपों की पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट के बाद ही मानी जाएगी।

एक नजर में पूरा मामला

  • 2023 में रूपसपुर थाने में दर्ज हुई थी पहली FIR
  • 14 मार्च 2024 को ED ने ECIR दर्ज की
  • जुलाई 2024 में कंपनी परिसरों पर छापेमारी
  • अगस्त 2024 में SVU को भेजा गया पत्र
  • सितंबर 2024 में भ्रष्टाचार से जुड़ा पहला केस दर्ज
  • फरवरी 2025 में EOU को भेजा गया नया पत्र
  • अप्रैल 2025 में दूसरी प्राथमिकी दर्ज हुई
  • सरकारी ठेकों में कथित हेरफेर की जांच जारी

आगे क्या?

फिलहाल मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी है। दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और ठेका प्रक्रियाओं की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं आरोपित पक्षों के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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