Bihar Sand Mining Ban 2026 आज से पूरे राज्य में लागू हो गया है। Bihar Sand Mining Ban 2026 के तहत 15 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सभी नदी घाटों से बालू खनन और उसके उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में वैध बंदोबस्तधारी भी नदियों से बालू का खनन नहीं कर सकेंगे।
खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने थाना स्तर तक निगरानी बढ़ाने और अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।
क्यों लगाई गई है चार महीने की पाबंदी?
बिहार में हर साल मानसून के दौरान नदी घाटों से बालू खनन पर रोक लगाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और नदी तंत्र को सुरक्षित रखना है।
खान एवं भूतत्व विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा के अनुसार, पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के तहत मानसून अवधि में नदी से बालू खनन प्रतिबंधित रहता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है। मानसून के दौरान खनन से नदी की धारा, जैव विविधता और तटों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
बंदोबस्तधारियों को भी नहीं मिलेगी छूट
इस बार की पाबंदी सभी के लिए समान रूप से लागू होगी। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वैध बंदोबस्तधारी भी नदी से बालू का खनन नहीं कर पाएंगे।
जिलों को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। अवैध खनन या परिवहन की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
थाना स्तर पर नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
क्या बिहार में बालू की कमी होगी?
बालू खनन पर रोक लगने के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माण कार्यों और बाजार में उपलब्धता को लेकर उठता है। हालांकि विभाग का दावा है कि आम लोगों को बालू की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार के अनुसार, राज्यभर के विभिन्न नदी घाटों के आसपास पहले से ही करीब 30 से 35 लाख क्यूबिक फीट (सीएफटी) बालू का भंडारण किया गया है।
यह स्टॉक लाइसेंसधारी विक्रेताओं के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा जब्त की गई बालू भी बिक्री के लिए उपयोग में लाई जा सकेगी।
लाइसेंसधारियों को मिला बिक्री का अधिकार
खनन पर रोक के बावजूद पहले से भंडारित बालू की बिक्री जारी रहेगी। विभाग ने लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं को स्टॉक रखने और बिक्री करने की अनुमति दी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण कार्यों को पूरी तरह प्रभावित होने से बचाना है। सरकार का मानना है कि बफर स्टॉक के कारण बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी और कीमतों पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
हालांकि मानसून के दौरान मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
राज्य से बाहर नहीं भेजी जाएगी बालू
पाबंदी के दौरान बिहार से अन्य राज्यों में बालू भेजने पर भी रोक लगा दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में दूसरे राज्यों के लिए ई-चालान जारी नहीं किए जाएंगे।
कैमूर, गया, नवादा और सीमावर्ती अन्य जिलों से अक्सर पड़ोसी राज्यों को बालू की आपूर्ति होती रही है। लेकिन इस बार उपलब्ध स्टॉक को बिहार की जरूरतों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप पूरे चार महीने तक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नजर रखेगा।
निर्माण क्षेत्र पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भंडारित बालू की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रहती है तो बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियों पर असर सीमित रह सकता है।
हालांकि स्थानीय स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए विभाग ने बाजार की स्थिति पर नजर रखने की भी तैयारी की है।
आवासीय निर्माण, सरकारी परियोजनाएं और निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य इस अवधि में स्टॉक पर निर्भर रहेंगे।
क्या कहते हैं अधिकारी?
खान एवं भूतत्व विभाग का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और नदी तंत्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण मानसून के चार महीनों में खनन गतिविधियों को पूरी तरह बंद रखा जाता है।
अधिकारियों का दावा है कि पर्याप्त बफर स्टॉक होने के कारण राज्य में बालू संकट की स्थिति नहीं बनेगी और आम उपभोक्ताओं को आवश्यक सामग्री उपलब्ध होती रहेगी।
