बिहार में शराब माफियाओं पर बड़ा एक्शन, 127 तस्करों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी


 बिहार में शराब माफिया के खिलाफ सरकार अब और सख्त रुख अपनाने जा रही है। राज्य में लागू शराबबंदी कानून को प्रभावी बनाने के लिए शराब माफिया पर आर्थिक चोट करने की रणनीति तैयार की गई है। मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने अवैध शराब कारोबार से संपत्ति अर्जित करने वाले 127 लोगों को चिह्नित किया है। इनकी संपत्तियों को जब्त करने के लिए न्यायालय में प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार का मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर कार्रवाई करने से शराब तस्करी के नेटवर्क को कमजोर किया जा सकेगा। इसी दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

127 शराब माफियाओं की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव

मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने शराब कारोबार से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान की है। ब्यूरो ने बीएनएसएस की धारा 107 के तहत न्यायालय को संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा है। अधिकारियों के अनुसार, इन 127 लोगों के खिलाफ पहले से शराब तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों की जांच चल रही है। अब उनकी चल-अचल संपत्तियों की कानूनी जांच के बाद जब्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

शराब बरामदगी में 11 फीसदी की बढ़ोतरी

मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के डीआईजी अजय कुमार पांडेय ने सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया कि वर्ष 2026 में बिहार पुलिस ने हर महीने औसतन 3,50,677 लीटर शराब बरामद की है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के मासिक औसत 3,14,610 लीटर से लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य में शराब तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार तेज किया गया है। वहीं, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने वर्ष 2026 में औसतन प्रतिमाह 1,06,237 लीटर शराब जब्त की है, जो वर्ष 2025 के औसत 85,645 लीटर की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है।

स्पिरिट और अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान

डीआईजी ने बताया कि मई 2026 तक राज्य पुलिस ने कुल 38,474 लीटर स्पिरिट जब्त की है। स्पिरिट का उपयोग अवैध शराब बनाने में किया जाता है, इसलिए इसकी बरामदगी को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। शराब तस्करों और उनके नेटवर्क को तोड़ने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार छापेमारी अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके कारण बड़ी मात्रा में शराब और उससे जुड़े संसाधनों की जब्ती संभव हुई है।

यूपी और झारखंड में भी चला ऑपरेशन

अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2026 में मई तक शराब माफिया के खिलाफ कुल छह विशेष ऑपरेशन चलाए गए। इनमें पांच अभियान उत्तर प्रदेश और एक झारखंड में संचालित किया गया। इन अभियानों के दौरान पांच करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की शराब और कई वाहन जब्त किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार पुलिस और मद्य निषेध विभाग राज्य की सीमाओं से बाहर जाकर भी नेटवर्क पर कार्रवाई कर रहे हैं।

57 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी

शराबबंदी कानून के उल्लंघन के मामलों में इस वर्ष अब तक बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। डीआईजी के अनुसार, मई 2026 तक कुल 57 हजार लोगों को मद्य निषेध अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। इनमें 19,877 कारोबारी और 37,027 शराब पीने वाले शामिल हैं। वहीं राज्य के भीतर से 569 शराब कारोबारी तथा अन्य राज्यों से पांच बड़े तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के साथ-साथ आर्थिक कार्रवाई पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि अवैध कारोबार को स्थायी रूप से रोका जा सके।

97 फीसदी जब्त शराब को किया गया नष्ट

मद्य निषेध विभाग के अनुसार, अप्रैल 2016 से मई 2026 तक जब्त की गई कुल शराब का 97 प्रतिशत हिस्सा नष्ट किया जा चुका है। यह प्रक्रिया न्यायालय और प्रशासनिक नियमों के अनुसार पूरी की जाती है। विभाग का दावा है कि इससे जब्त शराब के दोबारा अवैध बाजार में पहुंचने की संभावना समाप्त हो जाती है।

शराबबंदी को प्रभावी बनाने पर सरकार का फोकस

बिहार में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। सरकार लगातार दावा करती रही है कि कानून को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जबकि तस्कर नए तरीकों से नेटवर्क चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में 127 शराब माफियाओं की संपत्ति जब्त करने की तैयारी को शराबबंदी लागू कराने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन मामलों में आगे की कार्रवाई तेज हो सकती है।

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