Bihar Bridge Safety Report: 23 बड़े पुल गंभीर हालत में, 50 को तुरंत मरम्मत की जरूरत

 


बिहार में Bihar Bridge Safety Report ने राज्य के बुनियादी ढांचे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ताजा Bihar Bridge Safety Report के अनुसार राज्य के 23 बड़े पुलों की स्थिति गंभीर पाई गई है, जबकि 50 छोटे-बड़े पुलों को तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की जरूरत बताई गई है। राज्य सरकार द्वारा कराए गए व्यापक सेफ्टी ऑडिट और तकनीकी जांच के बाद यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के बाद संबंधित विभागों ने आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

मॉनसून की शुरुआत के बीच सामने आई इस रिपोर्ट ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ और तेज जल प्रवाह के मौसम में पुलों की मजबूती और सुरक्षा को लेकर सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है।

राज्यभर के 638 पुलों की हुई जांच

पुल निर्माण निगम ने राज्य में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले सभी प्रमुख पुलों की सुरक्षा और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की है। इस प्रक्रिया के तहत कुल 638 पुलों को चिह्नित किया गया और उनकी विस्तृत तकनीकी जांच कराई गई।

जांच रिपोर्ट में कई पुलों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है, लेकिन कुछ संरचनाओं में कमजोरी के संकेत भी मिले हैं। विशेषज्ञों ने 23 बड़े पुलों को विशेष निगरानी और सुदृढ़ीकरण की श्रेणी में रखा है।

इसके अलावा 50 ऐसे पुलों की पहचान की गई है जिनकी मरम्मत जल्द शुरू करने की आवश्यकता बताई गई है।

किन जिलों में हुई सबसे ज्यादा जांच?

सेफ्टी ऑडिट के दौरान बिहार के लगभग सभी प्रमुख जिलों के पुलों की जांच की गई। पश्चिम चंपारण में 49, मुजफ्फरपुर में 39, अररिया में 38, किशनगंज में 37 और पटना में 36 पुलों का निरीक्षण किया गया।

इसके अलावा कटिहार में 36, सुपौल में 35, पूर्वी चंपारण में 30, दरभंगा में 29 और पूर्णिया में 27 पुलों की तकनीकी समीक्षा की गई।

गया, नवादा, जमुई और सहरसा सहित अन्य जिलों में भी पुलों की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों के अनुसार यह राज्य स्तर पर अब तक के सबसे व्यापक पुल सुरक्षा सर्वेक्षणों में से एक है।

IIT पटना ने की महत्वपूर्ण पुलों की जांच

राज्य सरकार ने केवल सामान्य निरीक्षण तक खुद को सीमित नहीं रखा। बिहार के अत्यंत महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 बड़े पुलों की जांच IIT पटना के विशेषज्ञों से कराई गई।

विशेषज्ञ टीम ने इन पुलों की संरचनात्मक मजबूती, भार वहन क्षमता और दीर्घकालिक सुरक्षा का आकलन किया। प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है और उस पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत से बड़े हादसों को रोका जा सकता है।

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद बढ़ी चिंता

पिछले महीने भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया था। इस घटना ने बिहार के पुलों की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए थे।

घटना के बाद सरकार ने पूरे राज्य में पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्णय लिया। इसके तहत पुल निर्माण निगम और विशेषज्ञ संस्थानों को तकनीकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

विक्रमशिला सेतु की घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कई पुराने पुलों की नियमित निगरानी और समय-समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।

पथ निर्माण विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रिपोर्ट का आकलन किया। बैठक में कमजोर पुलों को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत बनाने का निर्देश दिया गया।

उन्होंने अधिकारियों और इंजीनियरों को चेतावनी भी दी है कि यदि किसी पुल की खराब स्थिति के लिए लापरवाही जिम्मेदार पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का फोकस फिलहाल उन पुलों पर है जो भारी यातायात वाले मार्गों पर स्थित हैं और जिनका उपयोग प्रतिदिन हजारों लोग करते हैं।

मॉनसून में क्यों बढ़ जाती है चुनौती?

बिहार में मॉनसून के दौरान कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है। बाढ़, तेज बहाव और लगातार बारिश का असर पुलों की संरचना पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन पुलों में पहले से तकनीकी कमजोरी मौजूद है, उनमें मॉनसून के दौरान अतिरिक्त दबाव पैदा हो सकता है। यही वजह है कि सरकार बारिश के मौसम में किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।

कमजोर पुलों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम जल्द शुरू होने की संभावना है।

आगे क्या होगा?

सरकार को मिली तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर अब प्राथमिकता तय की जा रही है। जिन पुलों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, वहां पहले मरम्मत और मजबूतीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सेफ्टी ऑडिट, आधुनिक तकनीक और समय पर रखरखाव से पुलों की उम्र बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में यह रिपोर्ट केवल चेतावनी नहीं बल्कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार भी बन सकती है।

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