बेतिया में सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पेंट्रीकार से मिली शराब, मैनेजर गिरफ्तार
बेतिया ट्रेन शराब बरामद मामले ने एक बार फिर बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच ट्रेनों के जरिए हो रही तस्करी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेतिया ट्रेन शराब बरामद की इस कार्रवाई में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने नरकटियागंज रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से आ रही सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पेंट्रीकार से विदेशी शराब की बड़ी खेप जब्त की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शराब यात्रियों के बैग या सामान्य डिब्बे से नहीं, बल्कि ट्रेन की पेंट्रीकार में छिपाकर लाई जा रही थी। मामले में पेंट्रीकार के मैनेजर को मौके से गिरफ्तार किया गया है।
रेलवे सुरक्षा बल की इस कार्रवाई के बाद रेल प्रशासन और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि शराब की खेप बिहार में अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाई जानी थी।
गुप्त सूचना पर नरकटियागंज स्टेशन पर हुई बड़ी कार्रवाई
आरपीएफ को कुछ समय से ट्रेनों के जरिए शराब तस्करी की सूचनाएं मिल रही थीं। इसी क्रम में अधिकारियों को जानकारी मिली कि दिल्ली से चलने वाली गाड़ी संख्या 12558 सप्तक्रांति एक्सप्रेस के माध्यम से बिहार में विदेशी शराब लाई जा रही है।
सूचना मिलते ही नरकटियागंज रेलवे स्टेशन पर विशेष टीम तैनात कर दी गई। ट्रेन के पहुंचते ही अधिकारियों ने सीधे पेंट्रीकार में तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दौरान वहां छिपाकर रखी गई शराब की बोतलें बरामद हुईं।
अधिकारियों ने मौके से कुल 62 बोतल विदेशी शराब जब्त की। बरामद शराब की कीमत का आकलन भी किया जा रहा है।
दिल्ली से बिहार लाई जा रही थी शराब की खेप
कार्रवाई के दौरान पेंट्रीकार के मुख्य मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि शराब की खेप दिल्ली से ट्रेन में लोड की गई थी।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि बिहार के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर इस शराब की डिलीवरी की जानी थी। हालांकि, यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हैं, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे तस्करी गिरोह तक पहुंचा जा सके।
रेल महकमे में मचा हड़कंप
सप्तक्रांति एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण सुपरफास्ट ट्रेन की पेंट्रीकार से शराब मिलने की घटना ने रेलवे प्रशासन को भी चौंका दिया है। आमतौर पर पेंट्रीकार यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए होती है, लेकिन उसी स्थान का कथित तौर पर अवैध तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाना गंभीर मामला माना जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते सूचना नहीं मिलती, तो यह खेप आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकती थी।
जीआरपी को सौंपा गया मामला
आरपीएफ ने गिरफ्तार मैनेजर और बरामद शराब को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए राजकीय रेल पुलिस (GRP) के हवाले कर दिया है।
अब जीआरपी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस पूरे मामले में रेलवे या पेंट्री स्टाफ के अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि शराब की आपूर्ति किसके निर्देश पर की जा रही थी और इसका अंतिम गंतव्य क्या था।
जांच एजेंसियां ट्रेन के रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं।
शराबबंदी के बीच तस्करी बनी चुनौती
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद समय-समय पर शराब तस्करी के नए तरीके सामने आते रहे हैं। कभी निजी वाहनों, कभी ट्रकों और अब ट्रेनों की पेंट्रीकार का इस्तेमाल होने जैसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेल मार्ग से होने वाली तस्करी पर रोक लगाने के लिए खुफिया निगरानी, नियमित जांच और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
इस ताजा कार्रवाई को आरपीएफ की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं, आगे की जांच से यह साफ होगा कि यह एक अकेली घटना थी या किसी संगठित तस्करी नेटवर्क का हिस्सा।
