25 दिन में फिर दौड़ेगी गाड़ियां, विक्रमशिला सेतु पर राहत की तैयारी

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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विक्रमशिला सेतु पर 25 दिनों के भीतर फिर से सिंगल लेन में वाहनों का आवागमन शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। विक्रमशिला सेतु के टूटे हिस्से की मरम्मत का काम 16 मई से शुरू होगा। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधिकारियों ने दावा किया है कि पहले 10 दिनों में टूटे स्लैब की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी, जबकि अगले 15 दिनों में पिलरों पर जरूरी तकनीकी काम खत्म कर ट्रैफिक बहाल कर दिया जाएगा।

इस जानकारी के बाद भागलपुर समेत पूर्वी बिहार के लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले कई दिनों से पुल बंद होने के कारण लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।

34 मीटर टूटे हिस्से की होगी मरम्मत

गुरुवार को भागलपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में पथ निर्माण विभाग के मंत्री ईं. कुमार शैलेंद्र ने अधिकारियों के साथ विक्रमशिला सेतु की स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान बीआरओ अधिकारियों ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त 34 मीटर हिस्से में मरम्मत कार्य तेजी से किया जाएगा।

अधिकारियों के मुताबिक, सबसे पहले टूटे स्लैब को बदला जाएगा। इसके बाद पिलरों पर स्पैन से जुड़ा तकनीकी कार्य पूरा होगा। पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसकी स्वतंत्र जांच भी कराई जाएगी।

पुल टूटने से बढ़ी थी लोगों की परेशानी

बीते 3 मई की आधी रात को विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। हादसे से पहले पुल के स्लैब में धंसाव देखा गया था, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल आवागमन रोक दिया।

समय रहते पुल खाली करा लिया गया था, इसलिए बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, पुल बंद होने से भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया और आसपास के जिलों का उत्तर बिहार से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया।

रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। पुल बंद होने के बाद लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

फेरी सेवा और अतिरिक्त ट्रेन से राहत

पुल बंद होने के बाद जिला प्रशासन ने गंगा नदी में फेरी सेवा शुरू करवाई है। इसके जरिए लोग नदी पार कर जरूरी कामों के लिए आवाजाही कर रहे हैं।

रेलवे ने भी यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। वहीं भारी वाहनों को दूसरे मार्गों से भेजा जा रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पुल बंद होने से कारोबार पर भी असर पड़ा है। खासकर फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हुई है।

आईआईटी विशेषज्ञों ने की सेफ्टी जांच

विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद आईआईटी पटना के विशेषज्ञों ने पुल का सेफ्टी ऑडिट किया। जांच में एक्सपेंशन गैप में बड़ी दरार और चौड़ाई बढ़ने की बात सामने आई।

विशेषज्ञों ने पुल के कई हिस्सों की तकनीकी जांच की है। रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत और मजबूतीकरण का काम किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस पुल का निर्माण साल 2001 में हुआ था। वर्ष 2017 में इसका मेंटेनेंस भी कराया गया था, लेकिन उसके बाद नियमित मरम्मत की जरूरत बनी हुई थी।

बिहार के पुलों का बनेगा हेल्थ कार्ड

समीक्षा बैठक में मंत्री कुमार शैलेंद्र ने बिहार के सभी पुलों का “हेल्थ कार्ड” तैयार करने का निर्देश भी दिया। इसमें पुलों की उम्र, स्थिति, मरम्मत और तकनीकी जानकारी दर्ज रहेगी।

सरकार का उद्देश्य समय रहते कमजोर पुलों की पहचान कर मरम्मत सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

मंत्री ने कहा कि बिहार के किसी भी इलाके से करीब साढ़े तीन घंटे में पटना पहुंचने के लक्ष्य पर तेजी से काम हो रहा है। इसके लिए फोरलेन सड़क, एक्सप्रेस-वे, फ्लाईओवर और नए पुल बनाए जा रहे हैं।

समानांतर पुल निर्माण भी जारी

विक्रमशिला सेतु के समानांतर एक नया पुल भी बनाया जा रहा है। यह पुल चालू होने के बाद पूर्वी और उत्तर बिहार के बीच यातायात दबाव कम करेगा।

हालांकि, नए पुल को शुरू होने में अभी कुछ महीने का समय लगेगा। ऐसे में फिलहाल पुराने विक्रमशिला सेतु को सुरक्षित तरीके से चालू करना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है।

स्थानीय लोगों की नजर अब मरम्मत कार्य की गति और गुणवत्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि यह पुल इस पूरे इलाके की लाइफलाइन माना जाता है।

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