तेजस्वी यादव जमानत मामले में गुरुवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। तेजस्वी यादव जमानत मामले में बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए, जहां सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी गई। मामला कोरोना काल के दौरान वैशाली जिले के राघोपुर में कथित तौर पर भीड़ जुटाने और कोविड नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है।
सुनवाई के बाद कोर्ट से बाहर निकलते हुए तेजस्वी यादव ने इस केस को “फर्जी मुकदमा” बताया। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याएं उठाने से रोकने के लिए यह मामला दर्ज कराया गया था।
एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई
गुरुवार को पटना स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत में पेशी के दौरान तेजस्वी यादव मौजूद रहे।
सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। मामले में पहले अदालत की ओर से समन जारी किया गया था, जिसके बाद उन्हें कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोरोना महामारी के दौरान लागू प्रतिबंधों से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, कोविड काल में देशभर में भीड़ जुटाने, सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू थे।
इसी दौरान वैशाली जिले के राघोपुर इलाके में तेजस्वी यादव पर भीड़ जुटाने और कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगा था।
प्रशासन की ओर से कहा गया था कि कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम और कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। इसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जमानत मिलने के बाद क्या बोले तेजस्वी यादव?
कोर्ट से बाहर आने के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि कोविड से जुड़े एक मामले में वे अदालत पहुंचे थे और उन्हें जमानत मिल गई है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि यह मुकदमा राजनीतिक उद्देश्य से दर्ज कराया गया था।
तेजस्वी यादव ने कहा कि उस समय जनप्रतिनिधि के रूप में वे आम लोगों की समस्याओं को उठा रहे थे और उसी वजह से उन पर कार्रवाई की गई।
हालांकि प्रशासन की ओर से पहले ही स्पष्ट किया गया था कि मामला कोविड नियमों के उल्लंघन से संबंधित है।
कोरोना काल में सख्त थे नियम
कोरोना महामारी के दौरान बिहार समेत पूरे देश में सार्वजनिक कार्यक्रमों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं।
सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन काफी सख्त था। नियमों का उल्लंघन करने पर कई राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर कार्रवाई भी हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को फैलने से रोकना था।
इसी वजह से राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक सभाओं पर भी लगातार नजर रखी जा रही थी।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
तेजस्वी यादव को जमानत मिलने के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
राजद समर्थक इसे राजनीतिक प्रताड़ना का मामला बता रहे हैं, जबकि विरोधी दलों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों का पालन जरूरी था।
हालांकि अदालत से जमानत मिलने के बाद फिलहाल तेजस्वी यादव को बड़ी राहत जरूर मिली है।
आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार जमानत मिलने का मतलब यह नहीं होता कि मामला खत्म हो गया है।
अब आगे की सुनवाई में अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करेगी।
फिलहाल इस मामले में तेजस्वी यादव को राहत मिलने के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।
