बिहार EV नीति 2026 को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। बिहार EV नीति 2026 के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई बड़े प्रोत्साहन देने का ऐलान किया है। नई नीति का उद्देश्य पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और महिलाओं समेत युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। सरकार का दावा है कि इस नीति से आने वाले वर्षों में बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक कार, दोपहिया और मालवाहक तिपहिया वाहनों की खरीद पर अलग-अलग आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। साथ ही चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।
महिलाओं को इलेक्ट्रिक कार पर मिलेगा बड़ा फायदा
नई नीति के तहत महिलाओं के नाम पर इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर सरकार 1 लाख रुपये का सीधा अनुदान देगी।
सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। यह फैसला महिला सशक्तिकरण और हरित परिवहन दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वाले सामान्य वर्ग के लोगों को 10 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 12 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा।
मालवाहक इलेक्ट्रिक ऑटो को भी मिलेगा प्रोत्साहन
राज्य सरकार ने मालवाहक इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के लिए भी आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।
सामान ढोने वाले इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर सामान्य वर्ग को 50 हजार रुपये और SC/ST वर्ग को 60 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े युवाओं को फायदा मिलेगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कम लागत वाला परिवहन विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
मोटर व्हीकल टैक्स में 50 फीसदी छूट
नई EV नीति के तहत बिहार में रजिस्टर्ड होने वाले सभी इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
सरकार का मानना है कि टैक्स में राहत मिलने से लोग पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से आकर्षित होंगे।
इसके अलावा स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को हटाने पर भी अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यह लाभ केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार दिया जाएगा।
2030 तक 10 करोड़ लीटर ईंधन बचाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस नीति के जरिए बड़ा पर्यावरणीय लक्ष्य भी तय किया है।
सरकार का अनुमान है कि 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से बिहार में हर साल करीब 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकेगी।
इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद जताई गई है। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक राज्य में बिकने वाले हर 100 नए वाहनों में से 30 वाहन इलेक्ट्रिक हों।
चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क पर रहेगा जोर
इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को माना जाता है। इसे देखते हुए सरकार ने चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई है।
मॉल, होटल, पेट्रोल पंप और बहुमंजिला इमारतों में चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकारी और निजी क्षेत्र के निवेशकों को चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए विशेष अनुदान भी दिया जाएगा। इससे राज्य में EV उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
सरकार ने “मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना” के जरिए युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की है।
इस योजना के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन आधारित परिवहन सेवाओं और चार्जिंग नेटवर्क में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर तेजी से बढ़ेगा। इससे तकनीकी, सर्विस और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कई नए रोजगार सामने आ सकते हैं।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर फोकस
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार की नई EV नीति पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
अगर चार्जिंग नेटवर्क और अनुदान योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से विस्तार कर सकता है।
फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नीति का लाभ जमीन पर कितनी तेजी से पहुंचता है।
