सीतामढ़ी में JE घूस लेते गिरफ्तार, नगर परिषद कार्यालय में हड़कंप


 

सीतामढ़ी के पुपरी नगर परिषद में घूसखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सीतामढ़ी में जूनियर इंजीनियर विजय कुमार शर्मा को निगरानी विभाग ने 1.45 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। सीतामढ़ी में जूनियर इंजीनियर की गिरफ्तारी के बाद नगर परिषद कार्यालय और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। निगरानी विभाग की टीम ने यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर की। आरोपी इंजीनियर पर विभागीय काम में सुविधा देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।

निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

1.45 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक, पुपरी नगर परिषद कार्यालय में तैनात जूनियर इंजीनियर विजय कुमार शर्मा ने एक विभागीय मामले में मदद करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

पीड़ित व्यक्ति ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और फिर विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की योजना तैयार की।

बताया गया कि जैसे ही परिवादी ने केमिकल लगे नोटों की गड्डी आरोपी इंजीनियर को सौंपी, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया।

कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारी भी अचानक हुई छापेमारी से हैरान रह गए।

निगरानी विभाग ने कैसे की कार्रवाई

निगरानी विभाग की टीम ने शिकायत मिलने के बाद कई स्तर पर जांच की। प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की तैयारी की गई।

विशेष टीम ने तय योजना के तहत शिकायतकर्ता को केमिकल लगे नोट दिए। जैसे ही आरोपी ने पैसे लिए, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद नोटों की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रिया मौके पर ही पूरी की गई। इसके बाद आरोपी को टीम अपने साथ लेकर चली गई।

निगरानी विभाग की कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

रिश्वत सिंडिकेट की चर्चा तेज

गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों का दावा है कि नगर परिषद में लंबे समय से अवैध उगाही का खेल चल रहा था।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार रिश्वत के पैसों को लेकर विभाग के अंदर सिंडिकेट जैसी व्यवस्था की चर्चा पहले भी होती रही है।

लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है ताकि आम लोगों को काम के लिए परेशान न होना पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।

डीएसपी ने गिरफ्तारी की पुष्टि की

निगरानी विभाग के डीएसपी पवन कुमार ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी जूनियर इंजीनियर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार इंजीनियर को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया है। वहां विशेष अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर आगे और कार्रवाई हो सकती है।

सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार को लेकर फिर बहस शुरू हो गई है। आम लोगों का कहना है कि कई बार छोटे-छोटे कामों के लिए भी रिश्वत की मांग की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया और ऑनलाइन मॉनिटरिंग बढ़ाने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में बिहार में निगरानी विभाग ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। इससे यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।

लोगों ने कार्रवाई का किया स्वागत

स्थानीय लोगों ने निगरानी विभाग की कार्रवाई का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि ऐसी सख्त कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में डर पैदा होगा।

कई लोगों ने उम्मीद जताई कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और यदि अन्य लोग भी इसमें शामिल पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुपरी नगर परिषद में हुई यह कार्रवाई अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक हलकों में भी इसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

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