करोड़ों के ठेका घोटाले में रिशु श्री गिरफ्तार, कई अफसरों पर नजर

 


रिशु श्री भ्रष्टाचार केस में बिहार की विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामी ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार कर लिया है। रिशु श्री भ्रष्टाचार केस की जांच में अब कई बड़े अधिकारियों और सरकारी ठेकों से जुड़े नेटवर्क पर भी नजर रखी जा रही है। एसवीयू ने पटना के मीठापुर स्थित उसके आवास पर छापेमारी और लंबी पूछताछ के बाद देर रात गिरफ्तारी की। गुरुवार को उसे निगरानी अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया।

एसवीयू अधिकारियों के मुताबिक, रिशु श्री पर सरकारी ठेके हासिल करने के लिए बड़े अधिकारियों को रिश्वत देने और प्रभाव का इस्तेमाल करने के आरोप हैं। एजेंसी अब उसे रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की तैयारी कर रही है।

विदेश भागने की तैयारी का आरोप

एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद ने बताया कि जांच के दौरान जानकारी मिली थी कि रिशु श्री केस से जुड़े अहम दस्तावेज लेकर विदेश भागने की योजना बना रहा था।

एजेंसी को यह भी आशंका थी कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से तत्काल गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान सरकारी ठेकों में अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित सांठगांठ से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

आईएएस अधिकारियों से संबंधों की जांच

एसवीयू द्वारा दर्ज एफआईआर में आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत कई अन्य लोगों का नाम शामिल है। आरोप है कि सरकारी ठेकों के बदले रिशु श्री ने कई विभागों के अधिकारियों को रिश्वत दी थी।

जांच में यह भी सामने आया कि जल संसाधन विभाग में प्रभाव का इस्तेमाल कर कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। बाद में ठेका दूसरी कंपनी को ट्रांसफर कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, नगर विकास, भवन निर्माण और जल संसाधन विभाग के कुछ तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि एजेंसियां अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर रही हैं।

ईडी रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ केस

इस मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच रिपोर्ट से हुई थी। ईडी ने पहले प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।

बाद में एसवीयू ने अप्रैल 2025 में केस संख्या 05/2025 दर्ज किया। इस एफआईआर में रिशु श्री, उसके करीबी कर्मी संतोष कुमार, निजी कंपनी के निदेशक पवन कुमार और कई अज्ञात अधिकारियों को आरोपी बनाया गया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, रिशु श्री से जुड़े कई वित्तीय लेनदेन और सरकारी अनुबंधों की फाइलें अब दोबारा खंगाली जा रही हैं।

58 करोड़ की संपत्ति और लग्जरी गाड़ियों का खुलासा

जांच के दौरान रिशु श्री के आवास से 61 सेल डीड बरामद हुए। ईडी के मुताबिक, इन संपत्तियों की सर्किल रेट वैल्यू करीब 58 करोड़ रुपये आंकी गई है।

इसके अलावा पटना, हाजीपुर और दिल्ली में संपत्तियों में निवेश की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियों ने दो पेट्रोल पंप और कई महंगी गाड़ियों से जुड़े दस्तावेज भी जुटाए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, रिशु श्री के पास पोर्श, बीएमडब्ल्यू और लैंड क्रूजर जैसी लग्जरी गाड़ियां थीं। उसके आवास से करीब दो करोड़ रुपये के आभूषण भी बरामद किए गए।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, उसके कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से करीबी संबंध बताए जाते रहे हैं।

एसवीयू अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी ठेकों के जरिए किन-किन लोगों को लाभ पहुंचाया गया और किस स्तर तक नेटवर्क सक्रिय था।

जांच एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों से भी पूछताछ हो सकती है। फिलहाल केस से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तार से जांच की जा रही है।

रिमांड पर लेकर होगी गहन पूछताछ

एसवीयू जल्द अदालत से रिशु श्री की रिमांड मांग सकती है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

एजेंसी विशेष रूप से बैंक खातों, सरकारी फाइलों, प्रॉपर्टी निवेश और अधिकारियों के साथ संपर्कों की जांच कर रही है। इसके अलावा उन कंपनियों की भी पड़ताल हो रही है जिन्हें कथित तौर पर सरकारी ठेकों में फायदा पहुंचाया गया।

फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन और जांच एजेंसियों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

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