रक्सौल से काठमांडू तक दौड़ेगी ट्रेन, 6 घंटे का सफर सिर्फ ढाई घंटे में, देखे अपडेट

 


पटना: Raxaul Kathmandu Rail Project को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार ने Raxaul Kathmandu Rail Project के फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 41 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद अब बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक सीधी रेल सेवा शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से भारत और नेपाल के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में भी भारी कमी आएगी।

करीब 136 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को आधुनिक और पूरी तरह विद्युतीकृत बनाया जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद सीमावर्ती इलाकों से लेकर नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों तक रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। सरकार का मानना है कि इससे व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

41 करोड़ जारी होने के बाद तेज हुई प्रक्रिया

विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना के फाइनल लोकेशन सर्वे हेतु 41 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि मिलने के बाद अब तकनीकी और जमीनी स्तर पर काम तेज किया जाएगा।

फिलहाल परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है। सर्वे पूरा होने के बाद निर्माण कार्य की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

रेल मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां इस प्रोजेक्ट को भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से बेहद अहम मान रही हैं। यही कारण है कि लंबे समय से लंबित यह योजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है।

136 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन

रक्सौल से काठमांडू तक बनने वाली रेल लाइन लगभग 136 किलोमीटर लंबी होगी। इसे पूरी तरह इलेक्ट्रिक ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो सके।

इस परियोजना पर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय रेल प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।

नई रेल लाइन के जरिए दिल्ली से काठमांडू तक सीधी रेल कनेक्टिविटी का रास्ता भी मजबूत होगा। इससे दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही पहले से ज्यादा आसान हो सकती है।

13 स्टेशनों से जुड़ेगा पूरा रूट

इस रेल मार्ग पर कुल 13 स्टेशन विकसित किए जाने की योजना है। इनमें रक्सौल, वीरगंज, बगही, पिपरा, डुमरवाना, चंद्रपुर, शिखरपुर, सिसनेरी और काठमांडू जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।

रेल लाइन रक्सौल से निकलकर जीतपुर, निजगढ़ और चोभर के रास्ते नेपाल की राजधानी काठमांडू तक पहुंचेगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा मिलेगा।

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रेल नेटवर्क पहुंचने से स्थानीय लोगों के लिए यात्रा और व्यापार दोनों आसान होने की उम्मीद है।

6 घंटे का सफर अब ढाई घंटे में

अभी सड़क मार्ग से रक्सौल से काठमांडू पहुंचने में करीब 6 घंटे का समय लगता है। नई रेल लाइन शुरू होने के बाद यही यात्रा लगभग 2 से ढाई घंटे में पूरी हो सकेगी।

इससे यात्रियों को आरामदायक और तेज यात्रा का विकल्प मिलेगा। खासकर पर्यटन और धार्मिक यात्रा करने वाले लोगों को बड़ा फायदा हो सकता है।

नेपाल घूमने जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। वहीं नेपाल से भारत आने वाले यात्रियों के लिए भी यह रेल सेवा उपयोगी साबित होगी।

2016 में हुआ था भारत-नेपाल समझौता

भारत और नेपाल के बीच इस परियोजना को लेकर 2016 में समझौता हुआ था। इसके बाद विभिन्न चरणों में तकनीकी अध्ययन और प्रारंभिक तैयारियां चलती रहीं।

हालांकि कई प्रक्रियात्मक कारणों से परियोजना की गति धीमी रही। अब सर्वे के लिए फंड जारी होने के बाद इसे नई रफ्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल परियोजना केवल यात्री सुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को भी मजबूत करेगी।

व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा

नई रेल सेवा शुरू होने से भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। माल ढुलाई आसान होने से ट्रांसपोर्ट लागत घट सकती है।

इसके अलावा पर्यटन उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। नेपाल के धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट सीमावर्ती इलाकों में रोजगार और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा देगा। खासकर बिहार और नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।

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