राहुल गांधी के बयान को लेकर बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राहुल गांधी के बयान को 140 करोड़ देशवासियों का अपमान बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है। राहुल गांधी के बयान के बाद बिहार में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। एनडीए के कई नेताओं ने कांग्रेस सांसद पर निशाना साधा है।
सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह बयान अराजकतावादी सोच को दर्शाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
सम्राट चौधरी ने क्या कहा?
सम्राट चौधरी ने अपने पोस्ट में कांग्रेस और गांधी परिवार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाएं सुरक्षित हुई हैं और भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है। सम्राट चौधरी के मुताबिक राहुल गांधी ने केवल प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि पूरे देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
उन्होंने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की। उनका कहना था कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर शब्दों की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
जीतन राम मांझी ने भी जताई नाराजगी
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक राजनीति के लिए ठीक नहीं है।
मांझी ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना गलत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है और उसकी राजनीति में निराशा साफ दिखाई दे रही है।
उन्होंने लोकतंत्र में भाषा की गरिमा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया और राहुल गांधी के बयान की निंदा की।
चिराग पासवान ने भी उठाए सवाल
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है।
चिराग पासवान ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की अभद्र टिप्पणी लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए सार्वजनिक बयान देते समय जिम्मेदारी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवैधानिक पदों का सम्मान सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। एलजेपी (रामविलास) ने भी राहुल गांधी के बयान की कड़ी निंदा की है।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और आरएसएस पर तीखी टिप्पणी की थी।
राहुल गांधी ने एक सभा में आरोप लगाया कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के हितों को चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में सौंपा जा रहा है।
रायबरेली में आयोजित ‘बहुजन स्वाभिमान सभा’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने लोगों से संविधान की रक्षा के लिए खड़े होने की अपील की। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया।
बाद में अमेठी में भी राहुल गांधी ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि जो संविधान को कमजोर करेगा, उसके खिलाफ वे बोलते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी दबाव में माफी नहीं मांगेंगे।
बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक गर्मी
राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बिहार समेत कई राज्यों में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एनडीए नेताओं ने कांग्रेस पर राजनीतिक शालीनता तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राज्यों की राजनीति में भी गूंज सकता है।
फिलहाल इस पूरे विवाद ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
