मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह को हथियार प्रदर्शन मामले में फिलहाल राहत नहीं मिली है। अनंत सिंह मामले में बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई हुई। अनंत सिंह मामले में अदालत ने अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी याचिका पर बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस बहुचर्चित मामले में 25 मई को अदालत अपना आदेश सुनाएगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद दर्ज हुए इस केस ने बिहार की राजनीति और कानून व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
यह मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमरांव गांव से जुड़ा है। यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कथित तौर पर हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन और अश्लील नृत्य का वीडियो वायरल हुआ था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल 2 और 3 मई को सेमरांव गांव में एक उपनयन संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में विधायक अनंत सिंह के शामिल होने की बात कही गई थी। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ।
वीडियो में कुछ लोग कथित तौर पर हथियार लहराते और डांसर के साथ नाचते दिखाई दिए। कार्यक्रम में भोजपुरी कलाकार गुंजन सिंह की मौजूदगी की भी चर्चा हुई।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। प्राथमिकी में अनंत सिंह, गुंजन सिंह समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय सह विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित और अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने पक्ष रखा।
बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि वायरल वीडियो एडिटेड है और इसे राजनीतिक साजिश के तहत प्रसारित किया गया। वकीलों ने कहा कि वीडियो से विधायक अनंत सिंह का सीधा संबंध नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 25 मई को कोर्ट यह तय करेगा कि अनंत सिंह को अग्रिम जमानत मिलेगी या नहीं।
गिरफ्तारी पर रोक लगाने से पहले भी किया था इनकार
इससे पहले भी अदालत ने अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। पिछली सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश राजेंद्र कुमार पांडेय ने केस डायरी और अन्य रिकॉर्ड की मांग की थी।
अदालत ने कहा था कि मामले के तथ्यों को विस्तार से देखने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। इसके बाद अगली तारीख 20 मई तय की गई थी।
कानूनी जानकारों के मुताबिक अदालत इस मामले में वीडियो, पुलिस जांच और बैलिस्टिक रिपोर्ट को अहम आधार मान सकती है।
पुलिस ने बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा नोटिस
गोपालगंज पुलिस ने इस मामले में हथियारों की बैलिस्टिक जांच कराने के लिए विधायक अनंत सिंह को नोटिस जारी किया था। नोटिस में 15 मई तक हथियार और लाइसेंस के साथ उपस्थित होने को कहा गया था।
हालांकि तय समय तक विधायक और उनके समर्थक जांच के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे हथियारों की वैधता और इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद का केंद्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो है। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई।
कुछ लोग इसे कानून व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि बचाव पक्ष इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो की सत्यता और उसके संपादन को लेकर भी बहस जारी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल दौर में वायरल वीडियो कई बार कानूनी और राजनीतिक विवाद को तेजी से बढ़ा देते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के लिए तकनीकी जांच अहम हो जाती है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर 25 मई को आने वाले कोर्ट के फैसले पर टिकी है। यदि अदालत अग्रिम जमानत याचिका खारिज करती है तो विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वहीं अगर अदालत राहत देती है तो पुलिस जांच की दिशा अलग हो सकती है। फिलहाल यह मामला बिहार की चर्चित कानूनी और राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो चुका है।
