बांकीपुर उपचुनाव में BJP को चुनौती देंगे प्रशांत किशोर? बढ़ी सियासी हलचल

 


बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रशांत किशोर चर्चा के केंद्र में हैं। बांकीपुर उपचुनाव को लेकर प्रशांत किशोर के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि उनकी पार्टी बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को हरा सकती है। बांकीपुर उपचुनाव को लेकर जन सुराज पार्टी लगातार सक्रिय नजर आ रही है और पार्टी नेताओं के बयान इस मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं।

शनिवार को मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि यह उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि बिहार में एनडीए सरकार के पहले वर्ष पर जनता की राय भी सामने लाएगा। हालांकि, उन्होंने खुद चुनाव लड़ने के सवाल पर सीधा जवाब नहीं दिया।

क्या बांकीपुर से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर?

जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि बांकीपुर सीट से पार्टी प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बना सकती है।

मनोज भारती ने कहा कि बांकीपुर से चुनाव लड़ने के लिए प्रशांत किशोर पार्टी की पहली पसंद हैं। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है। उन्होंने दावा किया कि इस सीट पर भाजपा को अगर कोई चुनौती दे सकता है तो वह जन सुराज पार्टी ही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतरते हैं तो यह उपचुनाव राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो सकता है।

उपचुनाव को “जनमत संग्रह” क्यों बता रहे हैं PK?

प्रशांत किशोर ने कहा कि जब बांकीपुर उपचुनाव होगा तब तक बिहार में एनडीए सरकार को सत्ता में आए करीब सात से आठ महीने हो चुके होंगे। ऐसे में यह चुनाव सरकार के कामकाज पर जनता की राय के रूप में देखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य सरकार की नीतियों और वादों पर भी जनता फैसला सुनाएगी।

जन सुराज पार्टी का दावा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने उनकी कई घोषणाओं को अपनाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि विधानसभा में उनका एक विधायक भी पहुंचता है तो वे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा सकते हैं।

बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है बांकीपुर सीट

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। नितिन नवीन ने इस सीट से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई थी।

साल 2006 में अपने पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव से नितिन नवीन ने यहां से चुनावी राजनीति शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार इस सीट पर जीत हासिल की।

हाल ही में उनके राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई है, जिस पर अब उपचुनाव होना है। यही वजह है कि विपक्षी दल भी इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।

जन सुराज की रणनीति क्या है?

पिछले विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद जन सुराज पार्टी अब संगठन मजबूत करने पर फोकस कर रही है। पार्टी बांकीपुर क्षेत्र में लगातार सर्वे और जनसंपर्क अभियान चला रही है।

मनोज भारती ने कहा कि बिहटा में जन सुराज का आश्रम भी बनाया जा रहा है, जो अपने तरह का अनोखा केंद्र होगा। पार्टी का दावा है कि वह पारंपरिक राजनीति से अलग मॉडल पेश करना चाहती है।

विश्लेषकों के मुताबिक, जन सुराज पार्टी इस उपचुनाव को 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रही है।

बांकीपुर उपचुनाव क्यों बना चर्चा का केंद्र?

बांकीपुर सीट केवल राजनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि शहरी वोटरों के प्रभाव के कारण भी अहम मानी जाती है। यहां का चुनावी परिणाम बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत माना जाता रहा है।

यदि भाजपा यहां अपनी पकड़ बरकरार रखती है तो यह एनडीए के लिए सकारात्मक संदेश होगा। वहीं, अगर विपक्ष मजबूत चुनौती देता है तो आगामी चुनावों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जन सुराज पार्टी आखिरकार किसे उम्मीदवार बनाती है और क्या प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरते हैं या नहीं।

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