पटना रिश्वत कांड में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जानीपुर थाने में तैनात एक दारोगा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पटना रिश्वत कांड के तहत अपर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह पर जमीन की घेराबंदी कराने के बदले एक लाख रुपये घूस लेने का आरोप है। विजिलेंस टीम ने उन्हें नहर की पूर्वी सड़क के किनारे पैसे लेते हुए पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान सड़क पर हंगामा और हाथापाई की स्थिति भी बन गई।
निगरानी विभाग के मुताबिक आरोपी दारोगा ने शिकायतकर्ता से जमीन विवाद में मदद करने के बदले रिश्वत मांगी थी। सत्यापन के बाद ट्रैप टीम गठित कर कार्रवाई की गई।
जमीन घेराबंदी के नाम पर मांगी गई रिश्वत
मामला रूपसपुर निवासी कौशल किशोर की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने निगरानी विभाग को बताया कि जानीपुर इलाके में उनकी निजी जमीन है, जिसकी सरकारी अमीन से मापी भी कराई जा चुकी है।
इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्व जमीन पर चहारदीवारी नहीं बनने दे रहे थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए जानीपुर थाने के अपर थानाध्यक्ष ने रिश्वत की मांग की।
बताया गया कि बातचीत के बाद एक लाख रुपये में सौदा तय हुआ। शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
विजिलेंस टीम ने बिछाया जाल
निगरानी विभाग ने प्रारंभिक जांच में आरोपों को सही पाया। इसके बाद निगरानी थाने में केस दर्ज कर विशेष ट्रैप टीम बनाई गई।
इस कार्रवाई का नेतृत्व अरुणोदय पांडेय ने किया। टीम ने तय योजना के तहत आरोपी दारोगा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
कार्रवाई जानीपुर इलाके में नहर की पूर्वी सड़क के पास की गई। जैसे ही आरोपी ने पैसे लिए, विजिलेंस अधिकारियों ने उसे हिरासत में लेने की कोशिश की।
गिरफ्तारी के दौरान सड़क पर हुआ हंगामा
गिरफ्तारी के दौरान मामला अचानक तनावपूर्ण हो गया। निगरानी विभाग के अनुसार आरोपी दारोगा ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की और मौके से भागने का प्रयास किया।
बताया जा रहा है कि विजिलेंस टीम को करीब 500 मीटर तक आरोपी का पीछा करना पड़ा। इसी दौरान सड़क पर हाथापाई की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी और अधिकारियों के बीच जोरदार धक्का-मुक्की हुई। इस घटना को देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
सर्विस रिवॉल्वर तानने का भी आरोप
निगरानी विभाग ने दावा किया है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी दारोगा ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर भी निकाल ली थी।
हालांकि विजिलेंस अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आरोपी को काबू में कर लिया। काफी मशक्कत के बाद उसे सरकारी वाहन में बैठाकर साथ ले जाया गया।
इस दौरान कई लोग सड़क पर हो रही पूरी घटना का वीडियो बनाते नजर आए। घटना के वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
अब विशेष अदालत में होगी पेशी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि आरोपी दारोगा से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ पूरी होने के बाद उसे निगरानी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।
विभागीय स्तर पर भी मामले की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
बिहार में हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। ऐसे मामलों में ट्रैप ऑपरेशन के जरिए कई सरकारी कर्मियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
क्यों अहम है यह कार्रवाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाई से जवाबदेही बढ़ती है।
साथ ही आम लोगों में यह संदेश जाता है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल इस मामले ने पटना पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
