NEET पेपर लीक में मेडिकल छात्रों का खेल, बिहार से कई राज्यों तक फैला नेटवर्क


 

NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को लगातार बड़े सुराग मिल रहे हैं। NEET 2026 पेपर लीक की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मेडिकल छात्रों, सॉल्वर गैंग और इंटर-स्टेट नेटवर्क की नई परतें खुल रही हैं। बिहार से शुरू हुई जांच अब राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड तक पहुंच गई है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इसमें मेडिकल छात्र, तकनीकी विशेषज्ञ और कथित सॉल्वर शामिल थे, जो लाखों रुपये लेकर अभ्यर्थियों को मेडिकल सीट दिलाने का दावा करते थे।

अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि कुछ आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां लगातार छापेमारी कर रही हैं।

अवधेश कुमार बना जांच की पहली कड़ी

जांच की शुरुआत अवधेश कुमार से हुई, जिसे पूरे नेटवर्क का अहम ऑपरेटर माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार अवधेश पावापुरी मेडिकल कॉलेज का सेकेंड ईयर एमबीबीएस छात्र है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह मेधावी छात्रों को मोटी रकम का लालच देकर सॉल्वर के रूप में जोड़ता था।

पुलिस के मुताबिक अभ्यर्थियों और फर्जी परीक्षार्थियों के बीच पहचान मिलान, एडमिट कार्ड की व्यवस्था और परीक्षा केंद्र तक सेटिंग कराने की जिम्मेदारी उसी के पास थी।

उसके पास से मोबाइल फोन, संदिग्ध चैट, नकदी और एडमिट कार्ड बरामद किए गए हैं।

अमन सिंह पर डिजिटल नेटवर्क संभालने का आरोप

इस मामले में दूसरा बड़ा नाम अमन कुमार सिंह का सामने आया है।

मोतिहारी निवासी अमन पर आरोप है कि वह अभ्यर्थियों और सॉल्वर के बीच संपर्क स्थापित करता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार वह परीक्षा केंद्रों की रेकी करने, बाहर से आने वाले सॉल्वरों के ठहरने और सुरक्षित मूवमेंट की व्यवस्था करता था।

व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के जरिए उसके कई संदिग्ध संपर्क सामने आने का दावा किया गया है।

पंकज कुमार पर कैश मैनेजमेंट का आरोप

तीसरा प्रमुख नाम पंकज कुमार साह का बताया जा रहा है।

करीब 25 वर्षीय पंकज को कथित तौर पर नेटवर्क का लॉजिस्टिक और कैश मैनेजर माना जा रहा है।

पुलिस का दावा है कि अलग-अलग जिलों और राज्यों से आने वाले लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने और पैसों के लेनदेन की जिम्मेदारी उसी के पास थी।

जांच एजेंसियों को शक है कि वह करोड़ों रुपये के कैश ट्रांसफर की निगरानी कर रहा था।

उज्ज्वल उर्फ राजा बाबू को बताया जा रहा मास्टरमाइंड

पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम उज्ज्वल राज का सामने आया है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक उज्ज्वल भी एमबीबीएस छात्र है और वही इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

उस पर बिहार से बाहर नेटवर्क फैलाने, राजस्थान के कोचिंग सिंडिकेट से संपर्क रखने और हाई-प्रोफाइल डील फाइनल कराने का आरोप है।

फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश में कई राज्यों में छापेमारी चल रही है।

बिहार से बाहर भी मिले नेटवर्क के लिंक

जांच आगे बढ़ने पर इस मामले के तार अन्य राज्यों से भी जुड़ते दिखाई दिए हैं।

देहरादून से गिरफ्तार राकेश नामक युवक का नाम “प्राइवेट माफिया” नाम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा मिला है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि वह कथित पेपर लीक और गेस पेपर सर्कुलेशन नेटवर्क से जुड़ा था।

इसके अलावा महाराष्ट्र के नासिक से जुड़े एक मेडिकल छात्र से भी पूछताछ की गई है। हालांकि उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

फर्जी एडमिट कार्ड और फोटो मॉर्फिंग का खेल

जांच में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका भी सामने आई है।

एजेंसियों के मुताबिक कुछ लोग एडमिट कार्ड एडिटिंग, फोटो मॉर्फिंग और फर्जी पहचान पत्र तैयार करने का काम कर रहे थे।

इसके अलावा डिजिटल कॉपी तैयार करने, पेपर स्कैनिंग और ऑनलाइन फॉरवर्डिंग जैसे काम भी नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

कुछ आरोपी अभ्यर्थियों को कथित गेस पेपर बेचकर भी ठगी कर रहे थे।

अब तक सात आरोपी गिरफ्तार

पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने अब तक सात से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा किया है।

छापेमारी के दौरान करीब 2.95 लाख रुपये नकद, दो लग्जरी कार, कई मोबाइल फोन, बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और संदिग्ध चैट बरामद किए गए हैं।

इसके अलावा फर्जी एडमिट कार्ड और डिजिटल दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

मेडिकल सीट के लिए 60 लाख तक की डील

जांच एजेंसियों का दावा है कि मेडिकल सीट दिलाने के नाम पर 20 लाख से 60 लाख रुपये तक की डील की जाती थी।

सॉल्वरों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने, फर्जी पहचान तैयार करने और नेटवर्क संचालन की पूरी तैयारी पहले से की जाती थी।

अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह नेटवर्क सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय था।

आगे और बड़े खुलासों की संभावना

जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।

फरार आरोपियों की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

फिलहाल यह मामला देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

और नया पुराने
हमसे जुड़ें
1

बड़ी खबर सबसे पहले पाएं!

देश, बिहार और नौकरी से जुड़ी हर बड़ी अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp Channel से जुड़ें।

👉 अभी WhatsApp चैनल जॉइन करें
होम क्विज वीडियो नोट्स NCERT