मुजफ्फरपुर बालगृह से 10 बच्चे लापता, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

 


बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में मुजफ्फरपुर बालगृह से 10 बच्चे लापता होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया है। रविवार देर रात मुजफ्फरपुर बालगृह से 10 बच्चे लापता हो गए, जिनमें चार मूक-बधिर बच्चे भी शामिल हैं। घटना के बाद आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गए हैं।

यह मामला मुशहरी थाना क्षेत्र के नरौली गांव स्थित वृहद आश्रय गृह का है। सोमवार सुबह जब गार्ड ने बच्चों को गायब देखा तो इसकी जानकारी गृह प्रबंधन को दी गई। सूचना मिलते ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की गई।

रात में खिड़की के रास्ते भागने की आशंका

आश्रय गृह के अधीक्षक अविनाश डे के अनुसार गृह में कुल 46 बच्चे रह रहे थे। इनमें से 10 बच्चे रविवार रात करीब एक बजे से दो बजे के बीच गायब हो गए।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रथम तल के हॉल की एक खिड़की की छड़ गायब थी। अधिकारियों को आशंका है कि बच्चे इसी रास्ते बाहर निकले।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि खिड़की की ग्रिल में काफी गैप था। संभव है कि बच्चे पाइप के सहारे नीचे उतरे और फिर मुख्य गेट पार कर बाहर निकल गए।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जिस समय बच्चे बाहर निकले, उस दौरान ड्यूटी पर तैनात गार्ड सो रहे थे। सुबह होने पर बच्चों के नहीं होने की जानकारी सामने आई।

लापता बच्चों में नेपाल का बच्चा भी शामिल

लापता बच्चों में एक बच्चा नेपाल का रहने वाला बताया गया है। इसके अलावा एक बच्चा समस्तीपुर और एक सीतामढ़ी जिले का है। अन्य बच्चों की पहचान और पता पूरी तरह सत्यापित नहीं हो पाया है।

जानकारी के अनुसार एक बच्चा पहले बाल श्रम से मुक्त कराया गया था और उसे आश्रय गृह में रखा गया था। अधिकारियों का कहना है कि सभी बच्चों की पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाई जा रही है।

घटना के बाद प्रशासन ने आश्रय गृह में रह रहे अन्य बच्चों से भी पूछताछ की। बच्चों के बयान के आधार पर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।

नेपाल जाने की आशंका पर जांच तेज

आश्रय गृह के सूत्रों के अनुसार नेपाल का रहने वाला बच्चा अक्सर अन्य बच्चों से नेपाल घुमाने की बात करता था। इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने नेपाल जाने की संभावना को भी जांच में शामिल किया है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि रात दो बजे के आसपास परिवहन सुविधा मिलना आसान नहीं था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि बच्चे पहले पैदल निकले होंगे।

पुलिस अब नेपाल सीमा की ओर जाने वाले मार्गों और आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा रही है। स्थानीय थानों को भी सतर्क कर दिया गया है।

सीसीटीवी फुटेज में दिखे बच्चे

मुशहरी पुलिस ने नरौली चौक के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। एक निजी कैमरे की फुटेज में कुछ बच्चे रात करीब दो बजे जाते हुए दिखाई दिए हैं।

हालांकि फुटेज में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बच्चे आगे किस दिशा में गए। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं किसी वाहन का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।

अलग-अलग मार्गों और चौक-चौराहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस तकनीकी जांच के जरिए बच्चों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

एक साथ 10 बच्चों के गायब होने के बाद आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जाएगी।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बाल संरक्षण गृहों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के लिए नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी और बेहतर निगरानी प्रणाली जरूरी है।

पुलिस ने दर्ज की गुमशुदगी की प्राथमिकी

घटना के बाद अधीक्षक अविनाश डे के आवेदन पर मुशहरी थाना में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

थानाध्यक्ष सुबोध कुमार मेहता ने बताया कि बच्चों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। आसपास के जिलों और संबंधित एजेंसियों को भी सूचना भेजी गई है।

प्रशासन का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित ढूंढना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पुलिस हर संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है।

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