अररिया नगर पंचायत घोटाला: 1.12 करोड़ गड़बड़ी में पूर्व EO पर केस

 


बिहार के अररिया जिले में जोकीहाट नगर पंचायत घोटाला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जोकीहाट नगर पंचायत घोटाला मामले में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी यानी ईओ विनोद कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और खरीद प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि मामला करीब 1.12 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा है।

यह कार्रवाई वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी मो. आतिउर रहमान की ओर से जोकीहाट थाना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के बाद हुई। मामला सामने आने के बाद नगर विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

डस्टबिन खरीद में गड़बड़ी का आरोप

जानकारी के अनुसार विनोद कुमार वर्ष 2022 से 2024 तक जोकीहाट नगर पंचायत में कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल के दौरान डस्टबिन सहित कई सामग्रियों की खरीद में नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगे।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इससे सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ और नगर पंचायत को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

मुख्य पार्षद, उपमुख्य पार्षद और अन्य पार्षदों ने इस मामले को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद शिकायत प्रशासन तक पहुंची।

डीएम ने गठित की थी जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी Inayat Khan ने पांच सदस्यीय जांच टीम बनाई थी। जांच टीम ने दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की।

जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को सही पाया गया। इसके बाद अररिया सदर एसडीओ ने तत्कालीन ईओ विनोद कुमार के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया।

यह आरोप पत्र साक्ष्यों के साथ नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना को भेजा गया था। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया नवंबर 2023 में पूरी कर ली गई थी।

दो साल बाद दर्ज हुई प्राथमिकी

जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। करीब दो साल बाद 30 अप्रैल 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग पटना की ओर से कार्रवाई का निर्देश जारी किया गया।

इसी निर्देश के आधार पर वर्तमान ईओ मो. आतिउर रहमान ने जोकीहाट थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी दर्ज होते ही जिले में हड़कंप मच गया।

वर्तमान अधिकारियों का कहना है कि सरकारी राशि के दुरुपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

फिलहाल मधुबनी में तैनात हैं आरोपी अधिकारी

जानकारी के मुताबिक आरोपी विनोद कुमार फिलहाल मधुबनी जिले के फुलपरास नगर पंचायत में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

मामले के सामने आने के बाद अब विभागीय कार्रवाई की संभावना भी बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

जोकीहाट थाना पुलिस ने कहा है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे मामले की जानकारी दी जा रही है।

नगर निकायों में पारदर्शिता पर फिर सवाल

इस मामले ने एक बार फिर नगर निकायों में खरीद प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार के कई नगर निकायों में पहले भी अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद और विकास योजनाओं में डिजिटल निगरानी और ऑडिट प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है। इससे भ्रष्टाचार के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर खर्च होने वाली राशि की नियमित निगरानी जरूरी है। इससे जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

पुलिस जांच में खुल सकते हैं और तथ्य

पुलिस अब प्राथमिकी के आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियां खरीद से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा कर सकती हैं।

अगर जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। फिलहाल यह मामला अररिया जिले में प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

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