मुजफ्फरपुर आश्रय गृह से 10 बच्चों के भागने का मामला बिहार में बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन गया है। मुजफ्फरपुर आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने सख्त कार्रवाई की है। मुजफ्फरपुर आश्रय गृह से बच्चों के भागने की घटना के बाद अधीक्षक समेत सात लोगों को निलंबित कर दिया गया है।
मंत्री ने साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय स्तर पर जांच भी तेज कर दी गई है।
मंत्री ने खुद पहुंचकर किया निरीक्षण
समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता मंगलवार शाम बोचहां विधायक बेबी कुमारी के साथ नरौली स्थित वृहद आश्रय गृह पहुंचीं। उन्होंने पूरे परिसर का निरीक्षण किया और अधिकारियों से घटना की विस्तृत जानकारी ली।
मंत्री ने वार्ड, रसोईघर और बच्चों के शयन कक्ष का जायजा लिया। इस दौरान बच्चों से पढ़ाई, रहने की व्यवस्था और दैनिक सुविधाओं के बारे में भी बातचीत की गई।
निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। आश्रय गृह में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद मिले और प्रथम तल की खिड़की की छड़ टूटी हुई पाई गई। सुरक्षा में तैनात होमगार्ड जवानों की लापरवाही पर भी मंत्री ने नाराजगी जताई।
अधीक्षक समेत सात लोगों पर गिरी गाज
मामले में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने आश्रय गृह के अधीक्षक अविनाश डे, गृह फादर और पांच होमगार्ड जवानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों के भागने की सूचना समय पर पुलिस को नहीं देना गंभीर चूक है। उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंत्री के निर्देश के बाद तत्काल कार्रवाई की गई है। विभाग अब पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करेगा।
तीन बच्चे समस्तीपुर में मिले
10 मई की रात आश्रय गृह से भागे 10 बच्चों में से तीन बच्चों को समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर और पूसा रोड इलाके से बरामद किया गया है। बरामद बच्चों में एक मूक-बधिर बच्चा भी शामिल बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार डीएसपी शिवानी श्रेष्ठा और एसआई सुखविंदर नैन के नेतृत्व में टीम ने बच्चों को सुरक्षित बरामद किया। बाकी बच्चों की तलाश के लिए विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
पुलिस को दो अन्य बच्चों के संबंध में भी सूचना मिली है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वे इसी आश्रय गृह के बच्चे हैं या नहीं। पुलिस तस्वीरों के आधार पर पहचान की प्रक्रिया कर रही है।
बच्चों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
बरामद बच्चों ने आश्रय गृह की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस उनसे बातचीत कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि बच्चों के भागने की असली वजह क्या थी।
इस घटना के बाद आश्रय गृहों की सुरक्षा और बच्चों की देखभाल को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, बोचहां विधायक बेबी कुमारी ने कहा कि बच्चों के भागने की घटना साफ तौर पर लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं बेहद गंभीर हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
भवन की हालत पर भी मंत्री नाराज
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि आश्रय गृह के नए भवन में कई जगहों पर पानी रिसाव की समस्या है। इस पर मंत्री ने नाराजगी जताई और निर्माण गुणवत्ता की समीक्षा कराने की बात कही।
उन्होंने परिसर में बेहतर रोशनी और आसपास के जंगल की साफ-सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया। मंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर वातावरण सरकार की प्राथमिकता है।
पुलिस जांच और एफआईआर दर्ज
इस मामले में मुशहरी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आश्रय गृह के अधीक्षक अविनाश डे के आवेदन पर बच्चों के अपहरण की सामान्य धारा में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब सीसीटीवी, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही फरार बाकी बच्चों की तलाश भी जारी है।
प्रशासन का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर और कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
