बिहार में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और लोगों को किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। साथ ही मुख्यमंत्री ने जरूरत पड़ने पर ही चार पहिया वाहनों के इस्तेमाल की सलाह दी और इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और तेल कंपनियों को निर्देश दिया कि आम लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए पीएनजी नेटवर्क विस्तार में तेजी लाई जाए।
पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही ईंधन का उपयोग करें।
सरकार का फोकस अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे न केवल ईंधन पर दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और किसी प्रकार की कमी की स्थिति नहीं है।
बिहार में पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस की सुविधा बढ़ाने से लोगों को राहत मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार बिहार में अब तक 1 लाख 12 हजार पीएनजी कनेक्शन चालू हो चुके हैं। इसके अलावा 25,813 नए आवेदन भी प्राप्त हुए हैं। इससे साफ है कि राज्य में पीएनजी की मांग लगातार बढ़ रही है।
बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निजी स्कूल फीस बढ़ोतरी पर सरकार सख्त
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर भी बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब स्कूल बिना नियम के फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।
सरकार ने पुनर्नामांकन शुल्क और अन्य प्रतिबंधित शुल्क लेने पर भी रोक लगाने की घोषणा की है। इससे लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से निजी स्कूलों की अतिरिक्त फीस को लेकर शिकायत कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके तहत सभी निजी विद्यालयों को फीस से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
किताब और यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता खत्म
सरकार ने अभिभावकों को एक और बड़ी राहत दी है। अब निजी स्कूल किसी विशेष दुकान या ब्रांड से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे।
अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से पढ़ाई की सामग्री और पोशाक खरीद सकेंगे। इससे शिक्षा पर होने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इस फैसले से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अभिभावकों को सस्ते विकल्प मिल सकेंगे।
सरकार का फोकस सुविधा और पारदर्शिता पर
राज्य सरकार की ओर से लिए गए इन फैसलों को आम लोगों की सुविधा और राहत से जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ सरकार ईंधन और ऊर्जा प्रबंधन को संतुलित रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र में अभिभावकों के हितों की रक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन, पीएनजी विस्तार और निजी स्कूलों पर निगरानी जैसे कदम आने वाले समय में बिहार की शहरी व्यवस्था और उपभोक्ता हितों को मजबूत कर सकते हैं।
