मोकामा में कुख्यात सोनू-मोनू गैंग के घर पुलिसकर्मियों की तलाशी का मामला अब बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। मोकामा में पुलिसकर्मियों की तलाशी का वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच बिहार सरकार के मंत्री सुनील कुमार के बयान ने विवाद को और तेज कर दिया है।
मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि किसी भी छापेमारी से पहले पुलिसकर्मियों को अपनी तलाशी देनी पड़ती है और यह एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
पुलिस की तलाशी पर मंत्री ने क्या कहा?
बिहार सरकार के मंत्री सुनील कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिस जब किसी जगह छापेमारी करने जाती है तो उसे पहले यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि उसके पास कोई आपत्तिजनक सामान नहीं है। इसी वजह से पुलिसकर्मी स्वयं अपनी तलाशी देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के मुताबिक होती है और अगर कहीं कोई गलती हुई है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि मामले पर वरिष्ठ अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोग इसे पुलिस की गरिमा से जोड़कर देख रहे हैं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था कमजोर होती दिख रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के गुर्गों ने पुलिसकर्मियों की जांच की और उसके बाद ही उन्हें घर में प्रवेश मिला। कांग्रेस ने इसे बिहार पुलिस की साख पर सवाल बताया।
राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज है। विपक्ष लगातार इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहा है।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
दरअसल, 24 मई को मोकामा के पचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में फायरिंग की घटना हुई थी। इस घटना में कुख्यात सोनू-मोनू गैंग का नाम सामने आया।
इसके बाद पुलिस टीम ने गैंग से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। इसी दौरान एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घर के बाहर खड़े नजर आए। वीडियो में एक व्यक्ति पुलिसकर्मियों की तलाशी लेते दिखाई दिया। तलाशी के बाद ही पुलिसकर्मियों को घर के अंदर जाने दिया गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
आठ जिलों में छापेमारी, फिर भी फरार सोनू सिंह
फायरिंग मामले में नामजद आरोपी सोनू सिंह और उसके सहयोगियों की तलाश में बिहार पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। तीन डीएसपी की अगुवाई में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। एसटीएफ को भी इस ऑपरेशन में लगाया गया है।
पुलिस ने छपरा, सीवान, मोतिहारी, कटिहार, गया, गोपालगंज, समस्तीपुर और बेगूसराय समेत कई जिलों में दबिश दी है। सीमावर्ती इलाकों में भी जांच अभियान चलाया गया।
हालांकि अब तक सोनू सिंह पुलिस की पकड़ से बाहर है। ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार के अनुसार जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
18 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं सोनू-मोनू
सोनू और मोनू दोनों सगे भाई हैं और पिछले करीब 18 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय बताए जाते हैं। शुरुआत में दोनों छोटे अपराधों में शामिल थे, लेकिन धीरे-धीरे उनका नेटवर्क बढ़ता गया।
दोनों के खिलाफ पहली प्राथमिकी वर्ष 2009 में मोकामा रेल थाने में दर्ज हुई थी। इसके बाद लूट, अपहरण और रंगदारी जैसे कई मामलों में इनके नाम सामने आए।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों भाइयों पर 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पटना, लखीसराय और बेगूसराय समेत कई जिलों के थानों में इनके खिलाफ केस दर्ज हैं।
वर्ष 2019 में मनरेगा अधिकारी के अपहरण मामले में भी दोनों भाइयों का नाम सामने आया था। उस समय पुलिस ने कार्रवाई कर अधिकारी को सुरक्षित बरामद कर लिया था।
कानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
मोकामा में पुलिसकर्मियों की तलाशी का वीडियो सामने आने के बाद बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी बता रहा है, जबकि सरकार इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक होती है और पुलिस इस पूरे विवाद पर आगे क्या कदम उठाती है।
