बिहार के मोकामा में हुए मोकामा गोलीबारी मामले ने पुलिस प्रशासन को भी कठघरे में ला खड़ा किया है। नौरंगा जलालपुर गांव में दो पक्षों के बीच फायरिंग के बाद छापेमारी करने गई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। इसी मोकामा गोलीबारी मामले में वायरल वीडियो सामने आने के बाद एसएसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया है।
रविवार को पटना एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान दोनों की कार्यशैली उचित नहीं पाई गई।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
शनिवार को पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में पुलिस छापेमारी के लिए पहुंची थी। यह कार्रवाई जदयू विधायक अनंत सिंह के विरोधी माने जाने वाले सोनू-मोनू के घर की जा रही थी।
इसी दौरान स्थानीय लोगों द्वारा पुलिसकर्मियों की तलाशी लिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठे।
सोशल मीडिया पर लोगों ने पुलिस की स्थिति और कार्रवाई को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। मामले ने तूल पकड़ा तो वरिष्ठ अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की।
गोलीबारी के पीछे सोशल मीडिया पोस्ट बना कारण
जानकारी के अनुसार गांव में दो पक्षों के बीच विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। दूसरे पक्ष की ओर से सोनू-मोनू को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट किया गया था।
इसके बाद दोनों गुटों में तनाव बढ़ गया और गोलीबारी की घटना हुई। आरोप है कि सोनू-मोनू ने सरपंच पति मुकेश सिंह पर गोली चलाई।
इस मामले में पुलिस ने सोनू, उसके पिता प्रमोद सिंह और सौरव के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
छापेमारी के दौरान बरामद हुई थी बाइक
पुलिस टीम ने पहले की कार्रवाई में सोनू-मोनू के घर से एक बाइक बरामद की थी। हालांकि बाद में वह बाइक वहां से गायब होने की बात भी सामने आई।
पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार का कहना था कि पुलिस द्वारा जब्त बाइक कुछ देर बाद मौके से हटा दी गई। इस मामले में भी अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बाइक कैसे और किन परिस्थितियों में वहां से गायब हुई। अधिकारियों ने इस पहलू को भी गंभीरता से लिया है।
प्रमोद सिंह की गिरफ्तारी को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
पुलिस और सोनू-मोनू के परिवार के बीच तनाव नया नहीं बताया जा रहा है। तीन दिन पहले भी पुलिस सादे लिबास में प्रमोद सिंह को गिरफ्तार करने गांव पहुंची थी।
उस दौरान पुलिस और प्रमोद सिंह के बीच बहस हुई थी। प्रमोद सिंह का दावा था कि उनकी गिरफ्तारी पर अदालत ने रोक लगा दी है। वहीं पुलिस का कहना था कि कोर्ट का संबंधित आदेश उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।
स्थिति विवाद बढ़ने से पहले पुलिस बिना गिरफ्तारी के वापस लौट गई थी। इस घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया।
कई महीनों से चल रहा था टकराव
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पंचमहला थानाध्यक्ष और सोनू-मोनू के बीच कई महीनों से विवाद चल रहा था। शुरुआती दौर में दोनों पक्षों के संबंध सामान्य बताए जाते थे, लेकिन बाद में मतभेद बढ़ गए।
सोशल मीडिया पर कई कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप भी वायरल हुए थे। इनमें पुलिस और स्थानीय गिरोहों के संबंधों को लेकर तरह-तरह के दावे किए गए थे।
सोनू-मोनू और उनके अधिवक्ता पिता प्रमोद सिंह का आरोप है कि थाने में प्रतिद्वंद्वी अपराधियों के साथ बैठकी होती थी। हालांकि पुलिस इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बता रही है।
सीसीटीवी नहीं होने पर भी उठे सवाल
मामले में यह बात भी सामने आई कि नवनिर्मित थाना भवन में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। इसे लेकर भी पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्रों के थानों में निगरानी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। वहीं पुलिस अधिकारी पूरे मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
फिलहाल दोनों थानाध्यक्षों के निलंबन के बाद यह मामला बिहार पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
