ज्योति मांझी काफिले पर हमले के बाद गया पुलिस पर भड़के जीतन राम मांझी
बिहार के गया जिले में ज्योति मांझी काफिले पर हमला अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने इस मामले में गया पुलिस और मोहनपुर थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि तय समय के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
17 मई 2026 को बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हुए हमले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मांझी ने इसे केवल सुरक्षा में चूक नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही बताया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
मीडिया से बातचीत में जीतन राम मांझी ने कहा कि विधायक ज्योति मांझी पर यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले भी कई बार उनके साथ ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मोहनपुर थाना की पुलिस स्कॉर्ट में मौजूद रहती तो यह घटना टाली जा सकती थी। मांझी ने दावा किया कि थाना प्रभारी ने सुरक्षा देने से यह कहकर इनकार किया था कि पुलिस वाहन में तेल नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई, तब वाहन में तेल कहां से आया। इस बयान के बाद पुलिस प्रशासन पर सवाल और बढ़ गए हैं।
अपराधियों को बचाने का लगाया आरोप
जीतन राम मांझी ने आरोप लगाया कि हमलावरों को जानबूझकर बचाया गया।
उन्होंने कहा कि घटना के समय पुलिस दोनों तरफ से पहुंच चुकी थी और चाहती तो आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर सकती थी। इसके बावजूद सभी हमलावर फरार हो गए।
मांझी का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक विफलता का मामला है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
महादलित समाज को लेकर भी दिया बयान
केंद्रीय मंत्री ने इस पूरे मामले को सामाजिक नजरिए से भी जोड़ते हुए बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि विधायक ज्योति मांझी महादलित समाज से आती हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मांझी ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश की जा रही है।
हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
सात से आठ दिन का दिया अल्टीमेटम
जीतन राम मांझी ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि यदि सात से आठ दिनों के भीतर थाना प्रभारी पर कार्रवाई नहीं हुई और हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा आंदोलन शुरू करेगी।
मांझी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता डीएम और एसएसपी आवास का घेराव करेंगे। इस चेतावनी के बाद जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 17 मई को बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हमला हुआ था। घटना के दौरान काफिले को रोकने और डराने की कोशिश की गई।
इसके बाद विधायक की ओर से सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए थे। मामले ने राजनीतिक रंग तब पकड़ा जब केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सार्वजनिक रूप से पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाए।
अब यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की नजरें इस मामले पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
बिहार में कानून-व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में एक विधायक के काफिले पर हमला राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विपक्ष भी इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल सभी की नजरें जिला प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
यदि आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और पुलिस स्तर पर जांच तेज होती है तो मामला शांत हो सकता है। लेकिन देरी होने पर आंदोलन की संभावना बढ़ सकती है।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
