पटना में आयोजित एआई समिट के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “हरे गमछे” वाले बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। “हरे गमछे” वाला बयान अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इस बयान को राजनीतिक निशाना साधने वाला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे तकनीक के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है।
AI समिट में क्या बोले सम्राट चौधरी?
शनिवार को पटना के ऊर्जा भवन में आयोजित एआई समिट के दौरान सम्राट चौधरी ने शहर में लगे एआई कैमरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पटना में करीब 4000 एआई कैमरे लगाए गए हैं और अगर एआई सिस्टम से कहा जाए कि “हरा गमछा वालों को खोजो”, तो वह तुरंत उन्हें पहचान लेगा।
हालांकि, बयान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनका इशारा किसी विशेष व्यक्ति या समूह की तरफ नहीं है। इसके बावजूद बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में प्रतीकों और रंगों की राजनीति पहले से ही संवेदनशील मुद्दा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
रोहिणी आचार्या ने एक्स पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहिणी आचार्या ने एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने “भगवा गमछा” का जिक्र करते हुए सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
रोहिणी ने लिखा कि अपराध, दंगा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों पर कार्रवाई की बजाय “हरे गमछा” वालों को टारगेट करने की बात की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को “पूर्वाग्रह से प्रेरित” और “द्वेषपूर्ण” बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार लोकतांत्रिक संघर्षों की भूमि है और जनता किसी भी प्रकार के तानाशाही रवैये का जवाब देना जानती है। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।
बयान पर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
बिहार की राजनीति में गमछा, टोपी और झंडों जैसे प्रतीकों का लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है। अलग-अलग दलों और सामाजिक समूहों की पहचान भी कई बार इन प्रतीकों से जुड़ी रहती है।
ऐसे में “हरे गमछे” का जिक्र होने के बाद विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा। विपक्ष का आरोप है कि सार्वजनिक मंच से ऐसे बयान सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ा सकते हैं।
दूसरी तरफ भाजपा और एनडीए नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने केवल एआई तकनीक की क्षमता समझाने के लिए उदाहरण दिया था। उनका कहना है कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
बिहार में AI तकनीक पर सरकार का फोकस
पटना में आयोजित एआई समिट का मुख्य उद्देश्य राज्य में तकनीकी विकास और डिजिटल निगरानी प्रणाली को मजबूत करना था। सरकार का दावा है कि एआई कैमरों की मदद से अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।
राज्य सरकार पहले भी स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम और डिजिटल पुलिसिंग को लेकर कई योजनाओं की घोषणा कर चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी पटना में लगे हजारों कैमरे रियल टाइम मॉनिटरिंग में मदद कर रहे हैं।
हालांकि, इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर निजता और निगरानी के मुद्दों पर भी बहस होती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग संवेदनशील तरीके से होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
सम्राट चौधरी और रोहिणी आचार्या के बयानों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते दिखे, जबकि कई लोगों ने इसे राजनीतिक रूप से गलत बताया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में चुनावी माहौल के बीच ऐसे बयान आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पैदा कर सकते हैं। फिलहाल यह मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच नई बयानबाजी का केंद्र बन गया है।
