दुनिया भर में मोक्ष की नगरी के रूप में प्रसिद्ध Gaya एक बार फिर भावनाओं और सनातन आस्था का केंद्र बन गया। रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए जवान की आत्मा की शांति के लिए उसकी बहन हजारों किलोमीटर दूर रूस से गया पहुंची। शहीद भाई के लिए पिंडदान की इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। गया में शहीद भाई के लिए पिंडदान कराने आई बहन ने पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। शहीद भाई के लिए पिंडदान के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और तर्पण की प्रक्रिया ने फल्गु घाट के माहौल को गमगीन बना दिया।
फल्गु घाट पर भावुक कर देने वाला दृश्य
शुक्रवार दोपहर Vishnupad Temple के नीचे स्थित देवघाट पर पिंडदान की प्रक्रिया संपन्न हुई। रूस से आई बहन ललिता राधा रानी फेस और उनके पति सुंदरा फेस ने अपने शहीद परिजन की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्थानीय पुरोहित कुमार गौरव ने पूरे कर्मकांड को वैदिक विधि से संपन्न कराया। इस दौरान परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और कई श्रद्धालु इस दृश्य को देखकर भावुक नजर आए।
“मेरा भाई बहुत साहसी था” — बहन की भावुक अपील
पिंडदान के दौरान शहीद जवान की बहन ललिता राधा रानी फेस ने कहा कि उनका भाई बेहद साहसी और परिवार के लिए समर्पित व्यक्ति था। उन्होंने बताया कि युद्ध में भाई की मौत के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
बहनोई सुंदरा फेस ने कहा कि गया जी में पिंडदान करने से आत्मा को मोक्ष और शांति मिलने की मान्यता है। इसी विश्वास के साथ वे रूस से यहां पहुंचे हैं। उन्होंने अपने साले और पिता की आत्मा की शांति के लिए भी पिंडदान किया।
परिवार का कहना है कि इस धार्मिक अनुष्ठान से उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतोष मिला है।
गया की सनातन परंपरा ने विदेशी परिवार को जोड़ा
गया की धार्मिक महत्ता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। हर साल बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। रूस से आए इस परिवार ने भी सनातन परंपरा में अपनी आस्था दिखाई, जिसकी स्थानीय लोगों ने सराहना की।
घाट पर मौजूद लोगों ने परिवार को हर संभव सहायता दी। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की ओर से भी विशेष व्यवस्था की गई ताकि परिवार को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गया केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भावनाओं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक भी है।
पितृपक्ष मेले से दुनियाभर में प्रसिद्ध है गया
Pitru Paksha Mela के कारण गया की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई है। हर वर्ष आश्विन महीने में आयोजित होने वाले इस मेले में देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
फल्गु नदी के तट पर लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गया में किए गए पिंडदान से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देश की कई बड़ी हस्तियां भी यहां आकर पिंडदान कर चुकी हैं। पितृपक्ष मेले के अलावा भी सालभर गया में धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड चलते रहते हैं।
विदेशी श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का बड़ा केंद्र
पुरोहित कुमार गौरव ने बताया कि यह परिवार विशेष रूप से पिंडदान के लिए ही गया पहुंचा था। उन्होंने कहा कि गया की आध्यात्मिक पहचान पूरी दुनिया में फैली हुई है। यही कारण है कि विदेशी श्रद्धालु भी यहां अपने पूर्वजों और परिजनों की आत्मा की शांति के लिए आते हैं।
उन्होंने युद्ध में जान गंवाने वाले सभी लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आस्था और भावनाएं सीमाओं से बड़ी होती हैं।
