बिहार सरकार ने मनरेगा के लिए जारी किए 66 करोड़, गांवों में तेज होंगे विकास कार्य


 

बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। Bihar MGNREGA Fund के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 66 करोड़ 66 लाख 66 हजार रुपये के राज्यांश को मंजूरी दी गई है। Bihar MGNREGA Fund जारी होने के बाद अब गांवों में सड़क, तालाब, नाला और जल संरक्षण जैसे विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस राशि के खर्च की स्वीकृति भी जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि इससे लंबित योजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

केंद्र की मंजूरी के बाद राज्य ने जारी किया हिस्सा

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार केंद्र सरकार ने बिहार के लिए सामग्री मद में 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

इसी के अनुपात में राज्य सरकार ने अपना हिस्सा जारी किया है, ताकि योजनाओं का काम बिना बाधा जारी रह सके।

सरकार का कहना है कि मनरेगा योजनाओं में वित्तीय प्रवाह बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि इससे ग्रामीण विकास की कई परियोजनाएं सीधे जुड़ी होती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर राशि मिलने से योजनाओं की गति प्रभावित नहीं होगी।

गांवों में सड़क, तालाब और नाला निर्माण को मिलेगा बल

इस फंड का इस्तेमाल गांवों में चल रहे विकास कार्यों पर किया जाएगा।

इनमें सड़क निर्माण, नाला सफाई, तालाब निर्माण, जल संरक्षण और मिट्टीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।

खासकर जल संरक्षण और तालाब निर्माण जैसे कार्य खेती और सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

लंबित योजनाओं को पूरा करने में मिलेगी मदद

राज्य के कई जिलों में मनरेगा के तहत चल रही योजनाएं बजट की कमी के कारण धीमी पड़ गई थीं।

अब नई राशि मिलने से इन लंबित परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी आने की उम्मीद है।

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फंड जारी होने के बाद कार्यों की निगरानी भी तेज की जाएगी।

इससे योजनाओं के समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।

रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद

Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act यानी मनरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि नई राशि जारी होने के बाद अधिक लोगों को काम मिल सकेगा।

विशेष रूप से गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा को आज भी रोजगार का बड़ा सहारा माना जाता है।

गांवों की अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हुआ तो गांवों की स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है।

मनरेगा के तहत होने वाले निर्माण कार्यों से मजदूरी बढ़ती है और ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।

इसके अलावा सड़क और जल संरक्षण जैसे कार्य लंबे समय तक गांवों को लाभ पहुंचाते हैं।

इससे खेती, परिवहन और ग्रामीण जीवन स्तर में भी सुधार संभव है।

अधिकारियों ने जताई सकारात्मक उम्मीद

ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फंड मिलने से योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार कार्यों के निष्पादन में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार का फोकस इस बात पर भी है कि राशि का उपयोग तय समय सीमा के भीतर किया जाए।

अधिकारियों के अनुसार जिलास्तर पर भी योजनाओं की निगरानी मजबूत की जाएगी।

ग्रामीण विकास पर सरकार का फोकस

पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है।

मनरेगा के जरिए गांवों में रोजगार और विकास दोनों को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान में देरी को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।

ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई राशि का उपयोग कितना प्रभावी तरीके से होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बदल सकती है तस्वीर

यदि योजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो गांवों में बुनियादी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सड़क, जल संरक्षण और तालाब निर्माण जैसे कार्यों से ग्रामीण जीवन आसान होने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि यह राशि ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन दोनों के लिए अहम साबित होगी।

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