बिहार में जमीन रजिस्ट्री के नए नियम लागू, अब CO रिपोर्ट के बिना नहीं होगी बिक्री

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बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया बदलेगी, 21 मई से लागू होंगे नए नियम

बिहार में जमीन रजिस्ट्री को लेकर सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। अब जमीन रजिस्ट्री से पहले संबंधित अंचल अधिकारी यानी CO की जांच रिपोर्ट जरूरी होगी। सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन के अनुसार 21 मई से यह व्यवस्था पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी।

नई व्यवस्था का मकसद जमीन खरीद-बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े और विवादों को रोकना है। इसके तहत विक्रेता तभी जमीन बेच सकेंगे जब संबंधित जमीन की जांच रिपोर्ट अंचल कार्यालय से मिल जाएगी। इससे खरीदारों को जमीन की वास्तविक स्थिति पहले ही पता चल सकेगी।

अब पोर्टल पर देनी होगी जमीन की पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत जमीन बेचने वाले व्यक्ति को ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

दस्तावेज अपलोड करते समय पोर्टल पर एक नया “सीओ कॉलम” दिखाई देगा। इसमें यह जानकारी देनी होगी कि जमीन किस अंचल क्षेत्र में आती है।

जैसे ही यह जानकारी दर्ज होगी, संबंधित CO के पास जमीन की जांच का अनुरोध स्वतः पहुंच जाएगा। इसके बाद अंचल अधिकारी जमीन की स्थिति की जांच करेंगे।

10 दिनों के भीतर देनी होगी जांच रिपोर्ट

सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक संबंधित CO को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी।

रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि जमीन निजी है या सरकारी। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि जमीन पर कोई विवाद तो नहीं है और दस्तावेज सही हैं या नहीं।

इसके अलावा विक्रेता का दावा वैध है या नहीं, इसकी भी पुष्टि करनी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही जमीन बिक्री और निबंधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

रिपोर्ट नहीं देने पर क्या होगा?

नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी रखा गया है। यदि किसी कारणवश CO तय 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट जारी नहीं करते हैं, तो पोर्टल पर अपलोड की गई जानकारी को आधार माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में खरीदार आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेगा। हालांकि संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी ताकि लापरवाही पर रोक लगाई जा सके।

इस कदम से जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहेगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।

फर्जीवाड़े और विवादों पर लगेगी रोक

राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से जमीन खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी।

अक्सर देखा जाता है कि लोग बिना पूरी जानकारी के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में विवाद सामने आते हैं। कई मामलों में सरकारी जमीन या विवादित जमीन की बिक्री भी हो जाती है।

अब खरीदारों को रजिस्ट्री से पहले ही जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

खरीदारों को मिलेगा पूरा रिकॉर्ड

नई गाइडलाइन के तहत अगर किसी खरीदार को जमीन को लेकर संदेह होगा तो वह अंचल कार्यालय में आवेदन देकर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।

अंचल कार्यालय की तरफ से संबंधित जमीन का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। इससे खरीदार अधिक सुरक्षित तरीके से निर्णय ले सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में जमीन विवाद के मामलों में भी कमी आएगी और न्यायालयों पर दबाव घट सकता है।

अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

पश्चिम चंपारण के जिला अवर निबंधक गिरीश चंद्र ने बताया कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले सभी CO को विभागीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

प्रशिक्षण के बाद उन्हें लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी उपलब्ध करा दिए गए हैं ताकि पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करने में किसी तरह की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जमीन खरीद-बिक्री को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगी। साथ ही गलत तरीके से संपत्ति हस्तांतरण पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम खरीदारों को होगा। उन्हें जमीन की वास्तविक स्थिति पहले ही पता चल जाएगी।

इसके अलावा फर्जी दस्तावेज, दोहरी बिक्री और सरकारी जमीन के सौदों पर नियंत्रण लगेगा। इससे जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी।

सरकार को उम्मीद है कि यह कदम बिहार में भूमि प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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