बिहार में EOU छापेमारी ने प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने बुधवार सुबह दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि यह EOU छापेमारी आय से अधिक संपत्ति मामले में की जा रही है। टीम बैंक खातों, जमीन के कागजात, निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।
सुबह करीब सात बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। फिलहाल किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। अधिकारियों की टीम लगातार दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई है।
किन-किन जगहों पर हुई छापेमारी?
जानकारी के मुताबिक, आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने बीडीओ चंद्र मोहन पासवान के कुल छह ठिकानों पर एक साथ दबिश दी है।
इनमें केवटी स्थित सरकारी कार्यालय और सरकारी आवास के अलावा बहादुरपुर थाना क्षेत्र में स्थित निजी आवास शामिल है। इसके साथ ही मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड स्थित पैतृक घर और सीतामढ़ी के एक ठिकाने पर भी जांच चल रही है।
अधिकारियों ने सभी जगहों पर दस्तावेजों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
क्या-क्या खंगाल रही है EOU टीम?
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम बैंक अकाउंट, जमीन से जुड़े कागजात, निवेश और आभूषणों की जानकारी जुटा रही है।
इसके अलावा संपत्ति खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बीडीओ की घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में कितना अंतर है।
हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी बरामदगी या संपत्ति के कुल मूल्य की पुष्टि नहीं की गई है।
आय से अधिक संपत्ति का आरोप
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्राथमिक जांच के दौरान बीडीओ चंद्र मोहन पासवान की संपत्ति उनकी घोषित आय से करीब 81 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उन पर लगभग 89 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। हालांकि, इस संबंध में ईओयू की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जांच एजेंसियां फिलहाल सभी वित्तीय दस्तावेजों और निवेश के स्रोतों की पड़ताल कर रही हैं।
नर्सिंग होम और अन्य संपत्तियों की भी जांच
स्थानीय चर्चाओं और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीडीओ चंद्र मोहन पासवान का पैतृक घर मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड के बैंसी गांव में है।
यह भी बताया जा रहा है कि बाबूबरही पूर्वी बाजार में उनके नाम से एक बंद पड़ा जीटी हेल्थ केयर नर्सिंग होम भी मौजूद है। जांच टीम इस संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
विशेष अदालत से जारी हुआ था वारंट
सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फरपुर स्थित निगरानी की विशेष अदालत से तलाशी वारंट जारी होने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई।
वारंट मिलने के बाद आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने सभी ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की योजना बनाई। इससे पहले भी बिहार में कई अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामलों में कार्रवाई हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए जरूरी है।
इलाके में दिनभर बनी रही हलचल
जैसे ही सुबह छापेमारी शुरू हुई, केवटी प्रखंड कार्यालय और सरकारी आवास के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी।
स्थानीय लोग तरह-तरह की चर्चाएं करते नजर आए। सुरक्षा कारणों से अधिकारियों ने किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।
पूरे दिन जांच एजेंसी के अधिकारी रिकॉर्ड खंगालते और दस्तावेज जब्त करते दिखाई दिए। माना जा रहा है कि जांच के बाद कई अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
बिहार में हाल के वर्षों में आर्थिक अपराध इकाई और निगरानी विभाग की कार्रवाई तेज हुई है।
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार छापेमारी की जा रही है। सरकार और जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सख्ती दिखा रही हैं।
अब इस मामले में भी सबकी नजर ईओयू की अंतिम जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
