बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी बांकीपुर उपचुनाव मजबूती से लड़ेगी और भाजपा को उसके मजबूत गढ़ में चुनौती देगी। पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बावजूद जन सुराज अब राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल सीट पर अपनी राजनीतिक ताकत आजमाने की तैयारी में जुट गई है।
यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। चुनाव आयोग आने वाले महीनों में इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। ऐसे में बिहार की राजनीति में यह सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।
प्रशांत किशोर ने BJP को दी सीधी चुनौती
जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने शिवहर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बांकीपुर सीट पर भाजपा को सीधी चुनौती देने की क्षमता सिर्फ उनकी पार्टी में है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले चार से पांच दशकों से इस सीट पर एक ही राजनीतिक परिवार का दबदबा रहा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस जैसी पार्टियां भी यहां भाजपा को नहीं हरा सकीं, लेकिन इस बार जन सुराज मुकाबले को दिलचस्प बनाएगी।
पीके ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए मैदान में नहीं उतर रही, बल्कि भाजपा के मजबूत किले को भेदने की रणनीति के साथ तैयारी कर रही है।
भाजपा का मजबूत गढ़ रही है बांकीपुर सीट
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। वर्तमान में यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पास थी।
नितिन नवीन लगातार पांच बार यहां से विधायक चुने गए। इससे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी लगातार चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
2008 के परिसीमन से पहले इस सीट को पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक इस सीट पर काफी मजबूत रहा है।
पिछले चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन कमजोर रहा
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली।
बांकीपुर सीट पर भी जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को सिर्फ 7717 वोट मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी।
वहीं भाजपा उम्मीदवार नितिन नवीन ने आरजेडी की रेखा कुमारी को करीब 51 हजार वोटों के बड़े अंतर से हराया था। ऐसे में राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस सीट पर जन सुराज के सामने बड़ी चुनौती होगी।
नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट
नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने मार्च महीने में विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद बांकीपुर सीट खाली हो गई।
नियमों के अनुसार, खाली हुई सीट पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी होता है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
इस सीट को लेकर भाजपा, जन सुराज और विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
भाजपा से कौन हो सकता है उम्मीदवार?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस सीट से एमएलसी संजय मयूख को उम्मीदवार बना सकती है।
संजय मयूख भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और उन्हें पार्टी का लो-प्रोफाइल लेकिन संगठनात्मक रूप से मजबूत नेता माना जाता है।
उनका विधान परिषद कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी उन्हें विधानसभा उपचुनाव में उतार सकती है।
हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक किसी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या बदल पाएगी जन सुराज की राजनीतिक तस्वीर?
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार की राजनीति में वैकल्पिक राजनीति का दावा कर रहे हैं। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
अब बांकीपुर उपचुनाव जन सुराज के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। यदि पार्टी यहां मजबूत प्रदर्शन करती है, तो उसे भविष्य की राजनीति के लिए नई ऊर्जा मिल सकती है।
दूसरी ओर, भाजपा के लिए भी यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। ऐसे में आने वाला उपचुनाव बिहार की राजनीति में काफी दिलचस्प मुकाबला साबित हो सकता है।
