बिहार में अब नहीं गिरेगा कोई पुल! मंत्री शैलेंद्र का बड़ा ऐलान


 

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद बिहार सरकार अब राज्य के पुलों की सुरक्षा को लेकर बड़े कदम उठाने जा रही है। बिहार के पुलों की निगरानी और रखरखाव के लिए पथ निर्माण विभाग विशेष योजना तैयार कर रहा है। बिहार के पुलों की स्थिति का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए अब हर पुल का “हेल्थ कार्ड” बनाया जाएगा। इसके तहत निर्माण वर्ष, मरम्मत, रखरखाव, लाइफटाइम और तकनीकी स्थिति जैसी अहम जानकारियां डिजिटल रूप से दर्ज की जाएंगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था के बाद राज्य में पुलों की सुरक्षा निगरानी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।

पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र ने गुरुवार देर शाम मुंगेर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए विभाग व्यापक स्तर पर काम शुरू कर रहा है।

हर प्रमंडल में तैनात होंगे वरिष्ठ अभियंता

पथ निर्माण विभाग अब प्रमंडलवार एक-एक वरिष्ठ अभियंता को पुलों की निगरानी की जिम्मेदारी देगा। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के पुलों का तकनीकी डाटा तैयार करेंगे।

इस डाटा में पुल कब बना, आखिरी बार मरम्मत कब हुई, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और भविष्य में कितनी मरम्मत की जरूरत है, जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी।

सरकार का मानना है कि एक केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार होने से समय रहते कमजोर पुलों की पहचान हो सकेगी। इससे हादसों की संभावना कम होगी और मरम्मत कार्य में तेजी आएगी।

दूसरे राज्यों की तकनीक से सीखेगा बिहार

पथ निर्माण मंत्री ने बताया कि विभाग की एक विशेष टीम महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों का दौरा करेगी। वहां पुल निर्माण और रखरखाव की आधुनिक तकनीकों का अध्ययन किया जाएगा।

यह टीम उन राज्यों में इस्तेमाल हो रही नई तकनीक, मॉनिटरिंग सिस्टम और रखरखाव के मॉडल की जानकारी जुटाएगी। इसके बाद बिहार में भी बेहतर तकनीक लागू करने की योजना बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते ट्रैफिक और पुराने पुलों पर दबाव को देखते हुए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।

विक्रमशिला सेतु से 25 दिन बाद गुजरेंगे छोटे वाहन

मंत्री ई. शैलेंद्र ने कहा कि भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु पर अगले 25 दिनों के भीतर हल्के वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ की टीम 16 मई से बेली ब्रिज बनाने का काम शुरू करेगी। यह अस्थायी तकनीकी संरचना होगी, जिससे छोटे वाहनों की आवाजाही बहाल की जा सकेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को जल्द राहत मिले और भागलपुर समेत पूर्वी बिहार का संपर्क सामान्य हो सके।

पुल टूटने के बाद बढ़ी थी परेशानी

बीते दिनों विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल पुल पर यातायात बंद कर दिया था।

इस घटना से भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया और आसपास के जिलों का उत्तर बिहार से संपर्क प्रभावित हो गया। हजारों लोगों को रोज लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ रहा है।

व्यापार और परिवहन पर भी इसका असर देखने को मिला। कई इलाकों में माल ढुलाई महंगी हो गई और यात्रियों को अतिरिक्त समय लगने लगा।

पुलों की निगरानी को लेकर बढ़ी चिंता

विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद राज्य में पुराने पुलों की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय-समय पर तकनीकी ऑडिट और रखरखाव बेहद जरूरी है।

कई पुल ऐसे हैं जिनका निर्माण वर्षों पहले हुआ था और अब उन पर ट्रैफिक दबाव पहले से कई गुना बढ़ चुका है। ऐसे में नियमित जांच और वैज्ञानिक निगरानी जरूरी मानी जा रही है।

सरकार का “हेल्थ कार्ड” मॉडल इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पुलों की वास्तविक स्थिति का अपडेटेड रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

बिहार में तेजी से बढ़ रहा इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क

राज्य सरकार सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। कई नए फोरलेन, फ्लाईओवर और पुल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

सरकार का दावा है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच यात्रा समय कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के साथ-साथ पुराने पुलों की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।

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