बिहार में जमीन से जुड़े मामलों के समाधान को तेज करने के लिए बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। बिहार भूमि व्यवस्था को आसान बनाने के उद्देश्य से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। बिहार भूमि से जुड़े मामलों में अब लोगों को बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य के नए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि राजस्व कर्मचारी अब सिर्फ शनिवार को अंचल कार्यालय में उपस्थित रहेंगे।
बाकी दिनों में कर्मचारी अपने-अपने ब्लॉक स्तर पर मौजूद रहकर दाखिल-खारिज, परिमार्जन और ई-मापी जैसे मामलों का समाधान करेंगे। सरकार का दावा है कि इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
अब हर दिन अंचल कार्यालय में नहीं होगी बैठक
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि अंचल कार्यालयों में रोजाना होने वाली बैठकों को समाप्त किया जाए।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राजस्व कर्मचारियों की उपस्थिति ब्लॉक स्तर पर सुनिश्चित की जाए।
इसके तहत कर्मचारी सीधे आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे और मौके पर ही समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
सरकार का मानना है कि पहले कर्मचारियों का अधिक समय बैठकों में चला जाता था, जिससे जमीन संबंधी मामलों के निपटारे में देरी होती थी।
शनिवार को ही अंचल कार्यालय में रहेंगे कर्मचारी
नई व्यवस्था के अनुसार सभी राजस्व कर्मचारी केवल शनिवार को अंचल कार्यालय में मौजूद रहेंगे।
इसी दिन “भू-समाधान दिवस” के दौरान भी उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इससे लोगों को एक तय दिन पर अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे मिलने का अवसर मिलेगा।
शनिवार को लंबित मामलों की समीक्षा, दस्तावेजों की जांच और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बाकी दिनों में ब्लॉक स्तर पर होगा काम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि शनिवार छोड़कर बाकी दिनों में राजस्व कर्मचारी अपने-अपने ब्लॉक क्षेत्रों में मौजूद रहेंगे।
इन दिनों वे दाखिल-खारिज, परिमार्जन, भूमि मापी, ई-मापी और अन्य राजस्व मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएंगे।
अधिकारियों का कहना है कि ब्लॉक स्तर पर ही समाधान होने से ग्रामीण इलाकों के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
अब लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए अंचल कार्यालय तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
जरूरत पड़ने पर होगी ऑनलाइन बैठक
नई व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।
विभाग ने कहा है कि यदि किसी जरूरी समीक्षा या बैठक की आवश्यकता होगी तो उसे ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
इससे कर्मचारियों का समय बचेगा और वे अधिक समय फील्ड में काम कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम अपनाने से कामकाज में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जमीन विवाद कम करने की कोशिश
बिहार में लंबे समय से जमीन विवाद बड़ी समस्या रहे हैं।
दाखिल-खारिज, मापी और रिकॉर्ड सुधार से जुड़े मामलों में देरी के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार छोटे विवाद भी लंबे कानूनी मामलों में बदल जाते हैं।
नई व्यवस्था को इन्हीं समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होती है तो आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
लोगों को अब हर काम के लिए अंचल कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। कई मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा।
इसके अलावा लंबित आवेदनों की संख्या कम होने और कार्यों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
राजस्व मामलों में समय पर कार्रवाई होने से भ्रष्टाचार और दलालों की भूमिका पर भी अंकुश लग सकता है।
सरकार ने समय सीमा में समाधान पर दिया जोर
मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि विभाग की पहली प्राथमिकता आम लोगों को राहत पहुंचाना है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन से जुड़े मामलों का समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में राजस्व विभाग में और प्रशासनिक सुधार किए जा सकते हैं।
डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने की तैयारी
राज्य सरकार अब जमीन संबंधी प्रक्रियाओं को और अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
ई-मापी और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को पारदर्शी और तेज सेवा मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और फील्ड स्तर पर सक्रियता के मेल से बिहार में भूमि प्रशासन की स्थिति बेहतर हो सकती है।
फिलहाल नई व्यवस्था को लेकर लोगों में उत्सुकता है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि इसका जमीनी असर कितना प्रभावी होता है।
