भोजपुर के लाल भरत सिंह भारती को पद्मश्री, गांव में जश्न का माहौल


 

भोजपुरी लोक कलाकार भरत सिंह भारती को पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पूरे बिहार, खासकर भोजपुर जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। भोजपुरी लोक कलाकार भरत सिंह भारती को कला के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान के लिए नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। इस सम्मान के बाद उनके पैतृक गांव ननऊर में लोगों ने मिठाइयां बांटी और खुशी का इजहार किया।

सोमवार शाम जैसे ही राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भरत सिंह भारती को पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया, गांव और परिवार में उत्साह की लहर दौड़ गई। ग्रामीण टीवी स्क्रीन पर यह ऐतिहासिक पल देख रहे थे और सम्मान मिलते ही जयकारे गूंज उठे।

राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान, गांव में मनाया गया जश्न

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए गए। इसी दौरान भोजपुर जिले के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार भरत सिंह भारती को भी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया।

समारोह के दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे। गांव ननऊर में उनके घर पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। जैसे ही सम्मान की घोषणा हुई, लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।

इस मौके पर कई ग्रामीण भावुक भी दिखे। लोगों ने इसे केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि पूरी भोजपुरी संस्कृति और भोजपुर की मिट्टी का सम्मान बताया।

78 वर्षों से भोजपुरी लोक संस्कृति की सेवा

भरत सिंह भारती पिछले करीब 78 वर्षों से भोजपुरी लोक संगीत और लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने में जुटे हैं। वे भोजपुरी लोक परंपरा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने लोक कला को गांवों से निकालकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।

उनका नाम भोजपुरी लोक परंपरा के महान कलाकारों भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र की विरासत को आगे बढ़ाने वालों में लिया जाता है। लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने भोजपुरी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली को जीवंत बनाए रखा।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज और शैली ने भोजपुरी संगीत को नई पहचान दिलाई है।

आकाशवाणी पटना से हजारों गीतों की दी आवाज

भरत सिंह भारती वर्ष 1962 से आकाशवाणी पटना से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि अब तक वे एक हजार से अधिक भोजपुरी गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं।

उनके गीतों में भोजपुरी समाज की परंपरा, गांव की मिट्टी और लोक जीवन की झलक देखने को मिलती है। यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता बिहार के अलावा देश के कई हिस्सों तक फैली हुई है।

लोक संस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि भरत सिंह भारती जैसे कलाकारों ने भोजपुरी भाषा और लोक संगीत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

पहले भी मिल चुका है बड़ा सम्मान

पद्मश्री से पहले भी भरत सिंह भारती को कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2023 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी अमृत पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया था। इस उपलब्धि के बाद भी उन्होंने लोक संगीत की सेवा जारी रखी।

उनकी इस यात्रा को कला और संस्कृति के क्षेत्र में संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत का उदाहरण माना जाता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने भरत सिंह भारती

गांव के लोगों और शिक्षकों ने कहा कि भरत सिंह भारती का सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन बताता है कि लोक संस्कृति और अपनी जड़ों से जुड़कर भी राष्ट्रीय पहचान बनाई जा सकती है।

ग्रामीण चंदेश्वर सिंह और प्लस टू उच्च विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मेनका कुमारी ने कहा कि यह सम्मान पूरे भोजपुरी समाज के लिए गर्व की बात है।

उनके परिवार के सदस्यों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और कहा कि भरत सिंह भारती ने पूरी जिंदगी भोजपुरी कला और संस्कृति को समर्पित कर दी।

बिहार की तीन हस्तियों को मिला पद्मश्री

इस वर्ष बिहार की तीन प्रमुख हस्तियों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। इनमें कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल त्रिवेदी, लोक नृत्य गुरु विश्वबंधु और भोजपुरी लोक कलाकार भरत सिंह भारती शामिल हैं।

इन सम्मानित हस्तियों ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है और बिहार का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।

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