भागलपुर में भूमि विवाद पर सख्त हुआ प्रशासन, 30 दिन में सस्पेंशन चेतावनी


 

भागलपुर में बढ़ते भूमि विवाद मामलों को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आ रहा है। जिले में लंबित भूमि विवाद आवेदनों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन के लिए प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नोटिस से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है।

बुधवार को समीक्षा भवन में हुई बैठक में भूमि विवाद मामलों की स्थिति, लंबित आवेदनों और उनके निष्पादन की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

सहयोग पोर्टल पर अपलोड हो रहे सभी आवेदन

जिलाधिकारी ने बैठक में बताया कि जिले में आने वाले सभी भूमि विवाद संबंधी आवेदनों को “सहयोग पोर्टल” पर अपलोड कराया जा रहा है। इस पोर्टल के जरिए हर मामले की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल पर दर्ज मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

प्रशासन का उद्देश्य यह है कि आम लोगों को कम समय में राहत मिले और विवाद लंबा न खिंचे।

10 दिन में कार्रवाई नहीं तो नोटिस

बैठक में डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस जारी किया जाएगा।

यदि मामला 20 दिनों तक लंबित रहता है तो दूसरा नोटिस दिया जाएगा। वहीं, 30 दिनों तक भी निष्पादन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन के इस फैसले को जिले में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सिर्फ निपटारा नहीं, गुणवत्तापूर्ण समाधान पर जोर

डीएम ने स्पष्ट कहा कि केवल मामलों का निपटारा करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि समाधान गुणवत्तापूर्ण और स्थायी हो।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिकतम सात दिनों के भीतर मामलों का निष्पादन करने की कोशिश करें। इससे लोगों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी से राहत मिलेगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि कई बार जल्दबाजी में किए गए फैसलों से विवाद फिर से बढ़ जाते हैं, इसलिए निष्पक्ष और संतुलित कार्रवाई जरूरी है।

रोजाना होगी लंबित मामलों की समीक्षा

बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे प्रतिदिन अपने अधीनस्थ कर्मियों से लंबित मामलों की रिपोर्ट लें।

इसके साथ ही सहयोग पोर्टल पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया। प्रशासन चाहता है कि किसी भी स्तर पर फाइलें लंबित न रहें और हर मामले की लगातार निगरानी हो।

पुलिस और प्रशासन के संयुक्त समन्वय से विवादों को जल्द सुलझाने की रणनीति तैयार की गई है।

2 जून को लगेगा सहयोग शिविर

जिला प्रशासन ने आम लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए 2 जून को “सहयोग शिविर” आयोजित करने की घोषणा की है।

इस शिविर में भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी और मौके पर ही समाधान निकालने की कोशिश होगी। प्रशासन का मानना है कि शिविर के जरिए लोगों को त्वरित राहत मिल सकेगी।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को इसमें भाग लेने की अपील की गई है।

भूमि विवाद क्यों बन रहे बड़ी चुनौती?

भागलपुर समेत बिहार के कई जिलों में भूमि विवाद लंबे समय से बड़ी प्रशासनिक चुनौती बने हुए हैं। कई मामलों में सीमांकन, कागजात और कब्जे को लेकर विवाद बढ़ जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने से छोटे विवाद भी गंभीर रूप ले लेते हैं। कई बार यह सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की समस्या तक बन जाते हैं।

इसी को देखते हुए अब जिला प्रशासन डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दे रहा है।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और संबंधित थाना अध्यक्ष मौजूद रहे।

बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जनता की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और निष्पादन में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाए।

प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में भूमि विवाद मामलों की निगरानी और भी सख्ती से की जाएगी।

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