बिहार के मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गोपालगंज के मीरगंज थाने में दर्ज मामले में पुलिस ने अदालत से नई धाराएं जोड़ने की अनुमति मांगी है। अनंत सिंह केस में अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 196 जोड़ने की अर्जी दी गई है, जिससे मामला और गंभीर हो सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर संगठित अपराध और सामाजिक वैमनस्य फैलाने से जुड़ी धाराएं जोड़ना जरूरी हो गया है।
इस मामले में पहले से ही हथियारों के प्रदर्शन और कथित आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने को लेकर प्राथमिकी दर्ज है। अब नई धाराएं जुड़ने से विधायक की कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
पुलिस ने अदालत में दाखिल की नई अर्जी
गोपालगंज पुलिस ने एसीजेएम-1 सह विशेष एमपी-एमएलए अदालत में आवेदन देकर दो नई धाराएं जोड़ने की मांग की है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 और 196 शामिल हैं।
धारा 111 संगठित अपराध से जुड़ी मानी जाती है, जबकि धारा 196 जाति और धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाने से संबंधित है। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।
पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और वीडियो सामग्री के आधार पर नई धाराएं जोड़ने की आवश्यकता महसूस हुई।
वायरल वीडियो से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव में आयोजित एक जनेऊ कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार दो और तीन मई को आयोजित कार्यक्रम में विधायक अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे।
इसी दौरान कथित तौर पर हथियारों के प्रदर्शन और जाति-धर्म से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
प्राथमिकी में विधायक के अलावा उनके 9 समर्थकों के नाम भी शामिल किए गए हैं। पुलिस वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
अदालत से मिली थी अंतरिम राहत
मामले में अनंत सिंह की ओर से अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान एडीजे-3 की अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए 30 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
हालांकि अब नई धाराएं जोड़ने की पुलिस की अर्जी के बाद मामले की गंभीरता बढ़ती दिख रही है। अदालत में इस आवेदन पर सुनवाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत नई धाराएं जोड़ने की अनुमति देती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।
जांच में किन पहलुओं पर है फोकस
पुलिस फिलहाल वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पोस्ट और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बयान जुटा रही है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि वायरल सामग्री किस तरह प्रसारित हुई।
इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान हथियारों के कथित प्रदर्शन और सार्वजनिक माहौल पर उसके प्रभाव की भी पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मामले से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा की भी जांच हो सकती है। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।
बिहार की राजनीति में फिर चर्चा में अनंत सिंह
अनंत सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से चर्चित चेहरा रहे हैं। मोकामा क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है और वे कई बार विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहे हैं।
इस नए मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अब तक जदयू की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस जांच एजेंसियां इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी है। यदि अदालत पुलिस की अर्जी स्वीकार करती है तो मामले में नई धाराओं के तहत आगे की जांच तेज हो सकती है।
वहीं, अनंत सिंह की कानूनी टीम भी अदालत में अपना पक्ष रखेगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों ही मामले को संवेदनशील मानते हुए सतर्कता बरत रहे हैं।
