रांची CM आवास पर बड़ा अपडेट: 100 करोड़ विवाद से सियासत गरम

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रांची में बन रहे CM आवास को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 12 मई 2025 को रांची के कांके रोड पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नए CM आवास की आधारशिला रखी। इस CM आवास के निर्माण को लेकर अब विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि इसमें 100 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि सरकार का दावा है कि यह CM आवास प्रशासनिक जरूरत के तहत बनाया जा रहा है।


रांची में CM आवास को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

झारखंड की राजधानी रांची में बन रहे नए मुख्यमंत्री आवास को लेकर सियासी माहौल गरम हो गया है। बीजेपी ने इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।

विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के पैसे से “शीश महल” बना रही है। उन्होंने कहा कि जब युवाओं के रोजगार और छात्रवृत्ति की बात आती है, तब सरकार संसाधनों की कमी बताती है।

मरांडी ने यह भी कहा कि सरकार अपनी प्राथमिकताओं से भटक गई है और जनता के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।


क्या है 100 करोड़ रुपये वाला दावा?

बीजेपी का दावा है कि इस CM आवास पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 67 करोड़ रुपये बताई गई है।

यह अंतर ही विवाद का मुख्य कारण बन गया है। विपक्ष इसे फिजूलखर्ची बता रहा है, जबकि सरकार इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया आरोप कह रही है।


सरकार ने क्या दिया जवाब?

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मुद्दे पर साफ किया है कि मुख्यमंत्री आवास का निर्माण किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि एक संस्थागत जरूरत है।

पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह एक आधुनिक और सुरक्षित परिसर होगा, जो भविष्य के मुख्यमंत्रियों के लिए भी उपयोगी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जब उनकी सरकार विकास कार्य करती है, तो विपक्ष उसे गलत तरीके से पेश करता है।


पुराने आवास की जगह बन रहा नया परिसर

रांची के कांके रोड स्थित पुराने ब्रिटिश कालीन मुख्यमंत्री आवास को हटाकर यह नया परिसर तैयार किया जा रहा है।

इस नए CM आवास में आधुनिक सुविधाएं, उन्नत सुरक्षा प्रणाली और प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप ढांचा विकसित किया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इससे शासन-प्रशासन को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।


सियासी आरोप-प्रत्यारोप क्यों तेज हुए?

बीजेपी ने इस परियोजना की तुलना दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के “शीश महल” विवाद से भी की है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने में पीछे है, लेकिन अपने लिए बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ा रही है।

वहीं JMM का आरोप है कि विपक्ष असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहा है।


आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?

इस पूरे विवाद का असर सीधे तौर पर आम लोगों की सोच और भरोसे पर पड़ता है।

इस फैसले से लोगों को यह जानने की उत्सुकता है कि क्या सरकारी खर्च सही दिशा में हो रहा है या नहीं।

जहां एक तरफ विकास और सुरक्षा की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जनता यह भी चाहती है कि शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर प्राथमिकता दी जाए।


आगे क्या होगा?

यह मुद्दा आने वाले समय में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विधानसभा सत्र और चुनावी माहौल में इस पर बहस तेज होने की संभावना है।

सरकार को अब पारदर्शिता के साथ परियोजना की पूरी जानकारी सामने रखनी होगी, ताकि विवाद कम हो सके।


Source: मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयान

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